कानपुर फील्डगन फैक्ट्री ने भारतीय नौ सेना के युद्घक जलपोतों पर इस्तेमाल होने वाली सुपर रैपिड गन माउंट एसआरसीएम आयुध को विकसित कर लिया है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इसे बनाया गया है। बृहस्पतिवार को नौ सेना के अफसरों की मौजूदगी में गन परीक्षण के लिए नौ सेना को हस्तांतरित की गई।
अभी तक इस तरह की गन इटली से नौ सेना आयात करती थी। परीक्षण में खरी उतरने पर निर्माणी में उत्पादन शुरू होगा। इस गन को बनाने के लिए नौ सेना की ओर से पिछले साल निर्माणी को प्रस्ताव दिया गया था। निर्माणी के जनसंपर्क अधिकारी एहतेशाम अख्तर ने बताया कि इस गन की रेंज 19 किलोमीटर है।
इसकी क्षमता एक मिनट में 110 राउंड फायर की है। निर्माणी ने पूरी डिजाइन तैयार करके स्वदेशी तकनीक से इसे विकसित किया है। इसमें लगे सभी उपकरण स्वदेशी हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की गन निर्माणी में पहली बार बनाई है। यह निर्माणी के लिए बड़ी उपलब्धि है।
वहीं हस्तांतरण कार्यक्रम के दौरान आयुध निर्माणी बोर्ड के अध्यक्ष हरिओम वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये जुड़े। महाप्रबंधक जीसी अग्निहोत्री के अलावा रियर एडमिरल संजय मिश्रा, कमोडोर बृजेंद्र वशिष्ठ, सीएस विश्वकर्मा, एके जैन,ईआर शेख, आरके सागर, दिनेश सिंह व राहुल यादव आदि मौजूद थे।