क्षेत्र के किसानों को जरूरत पर खाद नहीं मिल पा रही है। सहकारिता विभाग के
केंद्रों पर खाद का टोटा है। वहीं प्राइवेट दुकानदार एक बोरी पर औसतन 100
रुपये ज्यादा वसूल रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारी का कहना है कि मांग के
सापेक्ष आपूर्ति न होने के कारण समस्या है। कालाबाजारी की शिकायतों पर
कार्रवाई की जा रही है।
किसान अस्तिया के शिवप्रसाद मिश्र, घार के
मुन्नालाल, मलासा के बट्टन सिंह, डीघ के राजनारायण द्विवेदी, कैलई के अबरार
अहमद, निगोही के महेश शुक्ल ने बताया कि साधन सहकारी समितियों पर आने वाली
यूरिया खाद ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। 26 दिसंबर से समितियों
पर खाद नहीं मिल रही है।
वहीं बाजार में दुकानदार 334 रुपये की बोरी पर 100
रुपये ज्यादा वसूल रहे हैं। मंगलवार को पुखरायां में एक दुकान पर भीड़ लगी
रही। किसानों से पेशगी रुपये जमा कराकर खाद दी गई।
स्थानीय क्रय-विक्रय
समिति के सचिव जगदीश यादव ने बताया कि मंगलवार को दोपहर बाद 400 बोरी
यूरिया खाद उतरी। केंद्र पर करीब 1,000 किसान मौजूद थे, जिससे खाद नहीं
बांटी गई।
बुधवार को व्यवस्थित ढंग से वितरण किया जाएगा। बताया कि प्रत्येक
किसान को एक बोरी यूरिया और उसके साथ 65 रुपये कीमत का एक घुलनशील यूरिया
का पैकेट दिया जाएगा।
उसकी एक किलो मात्रा को 50 लीटर पानी में घोलकर एक
बीघा फसल में प्रयोग किया जा सकेगा। वहीं जिला कृषि अधिकारी रामसजीवन ने
बताया कि मांग के सापेक्ष 26 प्रतिशत आपूर्ति हुई है। सभी किसानों को एक ही
समय में जरूरत होने के कारण समस्या है। गेहूं की फसल में यूरिया खाद डाली
जा रही है।
कहा है कि कालाबाजारी पर अंकुश लगाया जाएगा। शिकायतों पर
कार्रवाई की जा रही है।