कानपुर देहात। कानपुर नगर के थाना अरौल क्षेत्र के गजना में तीन फरवरी 2024 को पिता और सौतेली मां ने पीट-पीटकर किशोरी की हत्या कर दी थी। पुलिस ने मामा की शिकायत पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश छह दुर्गेश की अदालत में चल रही थी। गुरुवार को अदालत ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अरौल निवासी अनीश आलम ने पुलिस को शिकायती पत्र दिया था। शिकायती पत्र में बताया था उनकी चचेरी बहन मीरा बानो की शादी गजना अरौल निवासी अनीस मोहम्मद से हुई थी। उनके एक पुत्र रिहान, तीन पुत्रियां रिहाना, फरजाना, गुलफशा हैं। चचेरी बहन की मौत के बाद बहनोई ने दूसरी शादी फरजाना खातून से कर ली। सौतेली मां व बहनोई भांजे व भांजियों के साथ मारपीट करते थे। जिसकी जानकारी उन्हें मिलती रहती थी। तीन फरवरी 2024 को ग्राम गजना से जानकारी मिली की भांजी रिहाना को सौतेली मां व पिता ने मारापीटा है। जिससे उसे गंभीर चोटें आई हैं। इसके बाद छत पर उसे लकड़ी के ढेर से ढंक दिया।
जानकारी पर ग्राम प्रधान पहुंचे तो भांजी छत पर मरणासन्न हालत में लकड़ी के ढेर में दबी मिली। इस पर उसे सीएचसी बिल्हौर भेजा। जहां से उसे हैलट कानपुर रेफर कर दिया गया। वहां पहुंचने पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले में मामा की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। जिसकी सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश छह में चल रही थी। 19 जनवरी को अदालत ने साक्ष्य व गवाह के आधार पर पिता व सौतेली मां को दोषी ठहराया था। सजा के बिंदुओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई हुई। अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस के बाद अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 70-70 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास काटना होगा।
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भाई, बहन और प्रधान की गवाही रही अहम
एडीजीसी विवेक त्रिपाठी ने बताया कि इस घटना में पुलिस ने जांच कर नौ मार्च 2024 को आरोप पत्र पेश किए थे। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने नौ गवाह पेश किए थे। इसमें मृतका के भाई रेहान उर्फ अलीम और बहन फरजाना की गवाई हुई। इसमें दोनों बच्चों ने अदालत को बताया कि सौतेली मां व पिता मारते पीटते थे। घटना के दिन बहन रिहाना की पिटाई कर लकड़ी के ढेर में छिपा दिया। प्रधान व पुलिस के आने पर अंदर नहीं जाने दिया। प्रधान अक्षय कटियार ने अंदर जाकर देखा तो रिहाना मरणासन्न हालत में छत पर लकड़ी के ढेर में दबी मिली। साक्ष्य के तौर पर भाई, बहन प्रधान की गवाही अहम रही।
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बेहरमी से हुई थी पिटाई शरीर पर मिली थीं 12 चोटें
एडीजीसी ने बताया कि रिहाना की बेरहमी से पिटाई की गई थी। उसके शरीर में 12 चोट के निशान पाए गए थे। घटना के बाद पिता व सौतेली मां छत से गिरने की बात कहते रहे। जबकि अभियोजन ने तर्क दिया कि रिहाना छत से गिरी किसी को जानकारी नहीं हुई, यदि वह छत से गिरती तो इतनी चोटें भी शरीर पर नहीं आथी। इधर जांच में पुलिस ने घटना स्थल से खून से सनी ईंट, खून से डंडा आदि बरामद किया था।