सजा के बाद कोर्ट से कातिलों को लॉकअप लेकर जाते पुलिसकर्मी
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फतेहपुर जिले में तीन भाइयों समेत पांच की सामूहिक हत्या में अपर सत्र न्यायाधीश/पाक्सो एक्ट कोर्ट प्रथम के पीठासीन अधिकारी विनोद कुमार चौरसिया की अदालत में 10 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दो अभियुक्तों को 35-35 हजार और बाकी आठ को 30-30 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है। फैसला 31 साल बाद आया है। पीड़ित परिवार ने कोर्ट के फैसले को सराहा है।
जघन्य हत्याकांड खागा कोतवाली क्षेत्र के गांव पाई में 23 जुलाई 1992 को हुआ था। वादी श्याम बिहारी शुक्ला के पुत्र कमलाकांत उर्फ जुजलाल, नरेंद्र, भतीजा गिरिजाशंकर उर्फ बमशंकर, पौत्र ओमप्रकाश व गांव के रमाकांत की गोली से भूनकर और लाठी डंडे से पीटकर हत्या कर दी गई थी। वादी का पुत्र कृष्णऔतार व शिवब्रत, पीतांबर गंभीर रूप से घायल हुए थे। हत्या में कौशांबी जिला सैनी थाना क्षेत्र के कानमेई निवासी सगे भाई संतोष दुबे और दिनेश दुबे, झल्लर पंडित, पाई गांव के बड़कू सविता, चंद्रपाल उर्फ छोटकू, बूंदी पासवान, अंसार, निसार, मकबूल, इकबाल, सत्तार, रशीद, एजाज, लल्लू खान, लल्लू उर्फ ललकू सविता कुल 15 के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, बलवा की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।