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Fatehpur: आठ साल से लापता युवक की तलाश के लिए हाईकोर्ट ने दिए आदेश, क्राइम ब्रांच कर रही मामले की जांच

Thu, 18 Sep 2025 09:40 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
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रामशरण द्विवेदी - फोटो : अमर उजाला
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जिस मामले में पूरा थाना आरोपी हो ऐसे में न्याय मिलना आसान नहीं है। जहानाबाद थाना क्षेत्र का ऐसा ही एक प्रकरण सामने आया है। पुलिस वर्ष 2017 से कानपुर के अपहृत युवक का पता नहीं लगा पा रही है। करीब आठ साल से अपहृत युवक की तलाश के लिए हाईकोर्ट इलाहाबाद के आदेश पर पुलिस फिर सक्रिय हुई है। अब प्रकरण की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। मामले में तत्कालीन जहानाबाद थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

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कानपुर बाबूपुरवा थाना क्षेत्र स्थित बाबूपुरवा काॅलोनी निवासी रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि घाटमपुर कोतवाली के महौलिया निवासी भाई रामशरण द्विवेदी है। उनके अनुसार मामला यह है कि जहानाबाद स्थित संपत्ति को लेकर तीन अप्रैल 2016 को भाई कौशल किशोर और रामशरण द्विवेदी के बीच विवाद हुआ था। पुलिस ने कौशल किशोर के बहकावे में पांच अप्रैल 2016 को रामशरण के खिलाफ गंभीर धाराओं के मामले दर्ज कर जेल भेज दिया था।

प्रकरण हाईकोर्ट इलाहाबाद पहुंचा। हाईकोर्ट के आदेश पर प्रमुख सचिव गृह ने पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट में कोई भी आपराधिक इतिहास न होने व पुलिस कर्मियों की कार्रवाई गलत होने पर विवेचना सीबीसीआईडी को जांच सौंपी गई। इसके बाद रामशरण चार अप्रैल 2017 को जेल से छूटने के बाद घर जहानाबाद के ठकुरन गली पहुंचे। यहां उसके कमरे में पुलिस का ताला लगा था। आरोप था कि पुलिस ने उसे ताला नहीं खोलने दिया। प्रकरण में 21 अप्रैल 2017 को हाईकोर्ट में याचिका डाली।
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हाईकोर्ट के आदेश पर 21 अगस्त 2017 को जहानाबाद पुलिस ने ताला खुलवाया। ताला खुलने के बाद कमरे से सारा सामान गायब था। इसकी एसपी से शिकायत की गई। कोई कार्रवाई न होने पर रामशरण ने हाईकोर्ट में याचिका डाली। हाईकोर्ट ने 23 अक्तूबर 2017 को जिला अदालत को निर्देश दिए। जहानाबाद पुलिस ने सीबीसीआईडी जांच और हाईकोर्ट के आदेशों से खुद को फंसता देखकर पीड़ित को धमकाने लगी।

इस वजह से रामशरण पुश्तैनी गांव महोलिया थाना घाटमपुर में रहने लगा। रामनारायण द्विवेदी के मुताबिक कानपुर से चार नवंबर 2017 को रामशरण अपने वकील अजय सिंह के साथ कचहरी फतेहपुर बाइक से जा रहा था। रास्ते में तत्कालीन थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार, एसएसआई नरेंद्र प्रताप सिंह, एसआई सुशील चंद्र यादव, कांस्टेबल राजेश सिंह, कांस्टेबल प्रभु दयाल, कांस्टेबल हरी गोविंद, कांस्टेबल इंद्र कुमार त्रिपाठी व कांस्टेबल जय प्रकाश ने रामशरण को अपने साथ ले गए। उसका मोबाइल भी बंद हो गया। इसके बाद से ही रामशरण का कुछ पता नहीं चल रहा है। आशंका जताई गई कि साजिश रचकर रामशरण की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई हो।

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