मजाक जैसा लगता है यह फैसला
उन्होंने न तो अपनी गलती स्वीकार की और न ही पछतावा जताया। प्रधान ने खुद को पीड़ित या बलिदानी की तरह पेश करने की कोशिश की। इस्तीफे को बड़ी जीत मानना छोटी सोच है। अब जिस व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया गया है उसे देखकर निराशा होती है। यह फैसला मजाक जैसा लगता है। उन्होंने कहा कि सीजेपी ने प्रदर्शन के दौरान ऐसे लोगों को भी जोड़ा जो आमतौर पर राजनीति से दूर रहते हैं।
कहा- वह आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं
आंदोलन में मीम्स और नए तरीकों का इस्तेमाल किया गया। इंस्टाग्राम पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला और आम लोगों ने भी विरोध प्रदर्शन को साझा किया। इससे आंदोलन बड़ा बन गया। यशस्वी राजे ने कहा कि वह आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं। वह पिछले साढ़े तीन साल से भारत में हैं और अकेले रहती हैं। कई साल से फतेहपुर नहीं गई हैं। उन्होंने कहा कि जो कहना होता है, वह कहती हैं और दोगली बातें नहीं करतीं।