रजिस्टर से मिलान पर बंदी रामबाबू वैश्य के भागने का पता लगा। बंदी दोपहर साढ़े तीन से शाम पांच बजे के बीच भागा है। इसके बाद लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मी भी फरार हो गए। रात 12:30 बजे लॉकअप प्रभारी की तहरीर पर सदर कोतवाली में पहरे पर तैनात रहे चारों पुलिस कर्मियों पर लापरवाही और बंदी पर अभिरक्षा से भागने का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस की एक टीम रात को कौशांबी रवाना हुई।
घर के आसपास तैनात हो गई। घर पहुंचते ही बंदी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस सुबह बंदी को कोतवाली लेकर आई। कचहरी से भागने के बाद बंदी रेलवे स्टेशन पहुंचा था। वह कालका एक्सप्रेस में बैठकर प्रयागराज पहुंच गया। इसके बाद प्रयागराज से कौशांबी गांव जा रहा था। पुलिस की पूछताछ में बंदी ने बताया कि दो माह से कपड़े नहीं बदले थे। वह भागा नहीं है। कपड़े बदलने के बाद घर से लौट आता।
चौकसी बरती गई
बंदी के भागने की घटना के बाद पुलिस मंगलवार को चौकसी बरतते नजर आई। पुलिस लॉकअप से बंदियों से मिलने के लिए इकट्ठा होने वालों को लाठी पटककर खदेड़ती दिखी। पुलिस लॉकअप और बंदियों के वाहन आते ही घेराबंदी कर लेती। एक-एक बंदी को गिनती के बाद अंदर से बाहर निकाला जाता रहा।
पहले भी भागे बंदी
- 2 फरवरी 2021 को विधातीपुर निवासी शिवशरण सिंह हत्या और एससी-एसटी के मामले में कोर्ट से पुलिस कर्मियों को चकमा देकर भाग निकला था। एक साल बाद गाजीपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया।
- 2014 में जहानाबाद थाने का मनोज सविता नोटों की हेराफेरी के मामले में पकड़ा गया था। वह कोर्ट से पेशी से लौटते समय भाग चुका है।
- 2016 में मुन्ना सिंह उर्फ नटवर उर्फ विजय भी पुलिस कर्मियों को चकमा देकर भाग चुका है।
- 2011 में गढ़ीवा का नीरज सिंह राणा पेशी के दौरान अपने घर से कलक्टरगंज में पकड़ा गया था।
- सनगांव का रहने वाला सजायाफ्ता फैजान उर्फ अंशू दो बार कोर्ट से पेशी के बाद भाग चुका है।