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UP: फैशन डिजाइनर के कातिल को 16 साल बाद मिली सजा, हत्या के बाद केमिकल से जलाया था शव, बोरे में मिला था नरकंकाल

Thu, 23 May 2024 04:56 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: 20 अगस्त 2008 को मूलगंज थाने में बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा चुके सूर्यकुमार को जब आईआईटी कैंपस में नरकंकाल मिलने की जानकारी मिली, तो उन्होंने डीएनए टेस्ट की मांग की थी। जांच में पता चला था कि हड्डियां आदेश की ही थीं।
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fashion desginer murder case - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मुंबई के फैशन डिजाइनर आदेश बाजपेई की हत्या में उम्रकैद की सजा पाए आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र राहुल वर्मा ने बड़े ही शातिर ढंग से वारदात को अंजाम दिया था। आईआईटी कैंपस में हत्या करने के बाद आदेश के शव को केमिकल डालकर जला दिया था। पिता की मांग पर कैंपस में मिले कंकाल की जब डीएनए जांच हुई, तो पता चला कि शव आदेश का ही था।

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डेटिंग ऐप के जरिए राहुल के संपर्क में आया था फैशन डिजाइनर आदेश
आदेश बाजपेई और राहुल वर्मा की मुलाकात डेटिंग एप के जरिये हुई थी। इसके बाद से दोनों में बातचीत होने लगी थी। इसके बाद आदेश मुंबई से राहुल से मिलने कानपुर आया था। इसके बाद अचानक लापता हो गया था। उसके पिता ने मूलगंज थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

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जनवरी 2012 में सीबीआई ने राहुल को किया था गिरफ्तार
20 अगस्त 2008 को मूलगंज थाने में बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा चुके सूर्यकुमार को जब आईआईटी कैंपस में नरकंकाल मिलने की जानकारी मिली, तो उन्होंने डीएनए टेस्ट की मांग की थी। जांच में पता चला था कि हड्डियां आदेश की ही थीं। वारदात के साढ़े तीन साल बाद (जनवरी 2012) सीबीआई ने आईआईएम लखनऊ में पढ़ाई कर रहे राहुल वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ और जांच में पता चला कि राहुल ही वो शख्स था, जिससे मिलने के लिए आदेश मुंबई से कानपुर पहुंचा था। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा हत्या, अपहरण, और साजिश की धारा में एफआईआर दर्ज की थी।

सफाई के दौरान बोरे में मिला था नरकंकाल
आईआईटी के जंगलों में सफाई के दौरान मजदूरों को बोरे में नरकंकाल मिला था। 2008 की इस घटना से संस्थान की देशभर में किरकिरी हुई थी। राहुल वर्मा ने आईआईटी से एमटेक किया है। कहा जाता है कि घटना वाले दिन राहुल वर्मा आदेश को आईआईटी हॉस्टल में लेकर आया था।

चचेरे भाई से मिलने के बाद आईआईटी गया था आदेश
सीबीआई जांच में पता चला कि फैशन डिजाइनर आदेश बाजपेई चार अगस्त 2008 को मुंबई से बिजनेस के सिलसिले में लखनऊ आया था। इसके बाद वह 13 अगस्त को मूलगंज में विवेक त्रिवेदी से मुलाकात की थी। विवेक ने उसे मूलगंज चौराहा छोड़ा था। इसके बाद राहुल के साथ आईआईटी चला गया। इसके बाद से उसका पता नहीं चला। 18 अगस्त को आदेश के पिता सूर्यकुमार शहर पहुंचे। उन्होंने तत्कालीन एसएसपी से मुलाकात की। इसके बाद मूलगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी।

हुईं थीं दो एफआईआर, फिर भी जांच को पुलिस ने ठंडे बस्ते में डाला
एसएसपी के आदेश पर मूलगंज पुलिस ने सूर्यकुमार की तहरीर पर आदेश के अपहरण का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस घटना की तफ्तीश कर रही थी। इस बीच आईआईटी परिसर में 23 अगस्त 2008 को नरकंकाल मिला। कंकाल की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। मामले में आईआईटी के सुरक्षा अधिकारी ने इसकी रिपोर्ट कल्याणपुर थाने में दर्ज कराई थी। पोस्टमार्टम के लिए कंकाल भेजा गया। मामले की जांच पुलिस ने फिर ठंडे बस्ते में डाल दी थी।

आईआईटी में मिली थी आदेश की लोकेशन, कॉल डिटेल से हुआ था खुलासा
सीबीआई ने राहुल को गिरफ्तार तो कर लिया था, लेकिन उसके खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं था। आदेश के कॉल डिटेल के रिकॉर्ड से पता चला था कि लापता होने से पहले आदेश आईआईटी-के परिसर के अंदर था। हालांकि सीबीआई ने राहुल को विशेष मजिस्ट्रेट आरएम वर्मा की अदालत में पेश किया और मामले को सुलझाने और अपराध के मकसद का पता लगाने के लिए सात दिन की रिमांड मांगी थी।

ई-मेल अकाउंट में दिखीं थीं कुछ तस्वीरें
हालांकि, अदालत ने सीबीआई को तीन दिन की अनुमति दी थी। इसके बाद सीबीआई ने विशेषज्ञ की मदद से आदेश बाजपेई का ई-मेल अकाउंट खोला और उन्हें कुछ तस्वीरें दिखाईं। इनमें से एक तस्वीर विवेक की भी थी। उसके साथ वह मूलगंज से आईआईटी कैंपस आने के लिए निकला था।

44 गवाह, 66 दस्तावेज से मामले की तह तक पहुंची सीबीआई
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया, दोनों मामलों में जांच के बाद, सीबीआई ने 20 अप्रैल, 2012 को आरोपी राहुल वर्मा के खिलाफ लखनऊ में सीबीआई मामलों के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक सामान्य आरोपपत्र दायर किया। मुकदमे के दौरान सीबीआई ने ठोस सबूत पेश किए, 44 गवाहों से सवाल-जवाब किए, 66 दस्तावेज और अपराध से संबंधित 16 सामग्री पेश कीं, जिसके आधार पर ही आरोपी को दोषी ठहराया गया।

कातिल को 16 साल बाद मिली गुनाह की सजा
लखनऊ की विशेष केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने 2008 में हुई मुंबई के फैशन डिजाइनर आदेश बाजपेई  की हत्या के मामले में बुधवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व छात्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामले में 16 साल बाद कातिल को उसके गुनाह की सजा मिली। सीबीआई की जांच से पता चला कि बाजपेई 10 अगस्त, 2008 को मामले के आरोपी और अपने दोस्त राहुल वर्मा से मिलने उत्तर प्रदेश के कानपुर आया था

दोनों एक समूह के सदस्य थे
जांच के अनुसार बाजपेई पांच अगस्त को मुंबई से पहले लखनऊ आया और फिर 10 अगस्त को कानपुर गया, जहां वह लापता हो गया। सीबीआई के प्रवक्ता ने बुधवार को कहा, मृतक आदेश बाजपेई और आरोपी राहुल वर्मा एक समूह के सदस्य थे। बाजपेई 10 अगस्त 2008 की रात कानपुर के मूलगंज चौराहे से आरोपी राहुल वर्मा के साथ गया था। एजेंसी ने दो मामलों को अपने हाथ में लिया, जिनमें एक, सुरक्षा गार्ड की रिपोर्ट के आधार पर आईआईटी-कानपुर परिसर में बरामद किए गए मानव अवशेषों वाले एक बोरे से संबंधित था और दूसरा बाजपेयी के पिता की ओर से दर्ज कराई गई गुमशुदगी की प्राथमिकी से जुड़ा हुआ था।
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साक्ष्यों ने हत्या में वर्मा की भूमिका को उजागर किया
सीबीआई के मुताबिक, चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) ने आईआईटी-कानपुर के परिसर से बरामद हड्डियों का डीएनए विश्लेषण किया और सीएफएसएल, दिल्ली ने वर्मा की मनोवैज्ञानिक जांच की। डीएनए रिपोर्ट से यह बात साबित हो गई कि आईआईटी, कानपुर में बरामद किए गए मानव अवशेष बाजपेई के थे। फोरेंसिक परीक्षणों, विशेषज्ञों की राय और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने बाजपेई की हत्या में वर्मा की भूमिका को उजागर किया। वर्मा को 24 जनवरी 2012 को हिरासत में लिया गया।
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