इनमें पूर्व में आवास पा चुके लाभार्थियों के नाबालिग पुत्रों को लाभार्थी बनाया गया। यह लाभार्थी न तो गांव में रहते हैं और न ही आवासों का निर्माण कराया गया। आवास की धनराशि निकालकर बंदरबांट कर लिया गया। कुलदीप, मोहित, मुनीश, नितिन, पवन कुमार, सुरजन सिंह, आशा, गौरव सिंह के शौचालय भी अधूरे मिले।
कोटेदार व परिजनों के बने जॉबकार्ड पर किया भुगतान
मनरेगा में बीघामऊ निवासी कोटेदार राजू, उनकी पत्नी राजेश्वरी, पुत्र कुलदीप, मोतीलाल के दो जॉबकार्ड, उसकी पत्नी कुसुमा देवी, पुत्र विकास, भूमिराज, शैलेंद्र व उसकी पत्नी पूजा कनौजिया, विजय सिंह व उसकी पत्नी निर्जला देवी, अजीत यादव, उसके भाई प्रवेश कुमार, रामशंकर व उसके भाई मुन्नलाल, विष्णुओम व उसकी पत्नी सीमा देवी, मोतीलाल व उसके भाई सोनेलाल, संतोष कुमार की पत्नी करिश्मा देवी व पुत्र मयंक, गीता देवी, अवधेश कुमार सिंह, सुरजा देवी आदि के जॉब कार्ड बनाकर उनके खातों में भुगतान किया गया। नौ जॉबकार्ड धारक ग्राम पंचायत से बाहर के निवासी हैं। उन्हें भी लाभ पहुंचाया गया।
सदस्य को पंचायत सहायक बनाने में भी दोषी
ग्राम पंचायत मौधा में तैनाती के दौरान ग्राम विकास अधिकारी राजीव गौतम ने ग्राम पंचायत सदस्य नगला दलजीत सिंह निवासी रश्मि यादव पत्नी सतेंद्र सिंह को पंचायत सहायक नियुक्त कर दिया था। 17 माह मानदेय भी दिया गया। शिकायत पर हुई जांच में सचिव गलत नियुक्ति में दोषी पाए गए।
इन सभी मामलों में डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक ने ग्राम विकास अधिकारी राजीव गौतम को निलंबित करते हुए अपने कार्यालय से संबद्ध कर लिया। बीडीओ कमालगंज आलोक आर्या को जांच अधिकारी नामित कर 15 दिन में आरोप पत्र तलब किया है। उन्होंने बताया कि सचिव की एक वेतन वृद्धि रोकने और पंचायत सहायक के मानदेय की रिकवरी के लिए जिलाधिकारी को संस्तुति की गई है।