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दिव्यांग उपकरण घोटाला: लुईस खुर्शीद पर आरोप तय, सचिव अतहर फारुकी पर भी शिकंजा, 18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

Tue, 11 Aug 2026 09:11 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद

सार

Farrukhabad News: दिव्यांगजनों के उपकरण वितरण के सरकारी अनुदान में हुए घोटाले के मामले में पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद और डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव अतहर फारुकी सोमवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने उनके गैर जमानती वारंट निरस्त करते हुए दोनों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को तय की है।
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अदालत में पेश होने के बाद वापस लौटतीं पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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फर्रुखाबाद जिले में दिव्यांगजनों के उपकरण वितरण के लिए मिले सरकारी अनुदान में घोटाले के मामले में पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद और डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव अतहर फारुकी सोमवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए। सुनवाई के बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन जयवीर सिंह ने आरोपियों के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट निरस्त कर दिए।

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साथ ही, दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं में आरोप तय किए। अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू), लखनऊ के तत्कालीन निरीक्षक रामशंकर यादव ने जांच के बाद 10 जून 2017 को कायमगंज कोतवाली में शहर के खतराना स्ट्रीट निवासी ट्रस्ट प्रतिनिधि प्रत्यूश शुक्ला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

कई महीनों से जारी थे गैर जमानती वारंट
आरोप था कि दिव्यांग उपकरण वितरण के नाम पर कई शिविर दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। विवेचना में ट्रस्ट के सचिव अतहर फारुकी और परियोजना निदेशक लुईस खुर्शीद के नाम भी सामने आए। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई अदालत में चल रही है। अतहर फारुकी के लगातार अदालत में उपस्थित न होने पर उनके खिलाफ कई महीनों से गैर जमानती वारंट जारी थे।

अदालत ने हिरासत में लेने का आदेश दिया
दोनों के अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार चौहान ने अपना पक्ष रखते हुए वारंट निरस्त करने का प्रार्थना पत्र दिया। वहीं, लुईस खुर्शीद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अंतरिम अग्रिम जमानत मिलने की जानकारी दी। अतहर फारुकी को अदालत ने हिरासत में लेने का आदेश दिया। अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद उन्हें जमानत दे दी। दोनों ने 50-50 हजार रुपये के निजी बंध पत्र दाखिल किए। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इस दौरान अधिवक्ता अंकुर मिश्रा, जिलाध्यक्ष शकुंतला देवी भी थीं।
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जांच में सामने आया था फर्जीवाड़ा
आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की जांच के अनुसार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से ट्रस्ट को 30 मार्च 2010 को 71.50 लाख रुपये का अनुदान मिला था। चार लाख रुपये फर्रुखाबाद के दिव्यांगजनों के उपकरण के लिए निर्धारित थे। जांच में 29 मई 2010 को कायमगंज में शिविर आयोजित होने संबंधी 32 लाभार्थियों की सूची वाली टेस्ट चेक रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट पर तहसीलदार कायमगंज और मुख्य चिकित्साधिकारी के सत्यापन व प्रतिहस्ताक्षर बताए गए थे। जांच में दोनों अधिकारियों के हस्ताक्षर और मुहर फर्जी व कूटरचित पाए गए तथा शिविर आयोजित होने का भी कोई साक्ष्य नहीं मिला। इसी आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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