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फर्रुखाबाद: किशोरी से दुष्कर्म में दो को आजीवन कारावास, 50-50 हजार रुपये जुर्माना

Fri, 31 Jul 2020 09:54 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
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कोर्ट ने सुनाया फैसला - फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद जिले में विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश हर्षवर्धन ने मंदबुद्धि किशोरी से दुष्कर्म करने के मामले में दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 50-50 हजार रुपये जुर्माना किया है। 
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मऊदरवाजा थाना क्षेत्र निवासी ग्रामीण ने गांव खतवापुर निवासी रिंकू के खिलाफ सात सितंबर 2016 को मऊदरवाजा थाने में 13 वर्षीय पुत्री के साथ दुष्कर्म करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि उसकी 13 वर्षीय बड़ी पुत्री मंदबुद्धि है। सात सितंबर को सुबह उसके पेट में दर्द हुआ। डॉक्टर को दिखाने पर पता चला कि वह गर्भवती है।

पूछने पर पुत्री ने बताया कि मक्का के खेत की रखवाली करते समय रिंकू ने पैसा देने का लालच देकर खेत के अंदर बुला लिया। वहां धमका कर उसके साथ दुष्कर्म किया। घर पर कुछ बताने पर जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने रिंकू को गिरफ्तार कर पूछताछ की। विवेचना में उसके दोस्त मनोहर का भी नाम प्रकाश में आया। उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
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विवेचक ने रिंकू व मनोहर के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। आरोपी मनोहर जमानत मिलने पर जेल से छूट गया, लेकिन रिंकू को जमानत नहीं मिली। वह जेल में है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शिवनरेश सिंह, अनुज कटियार ने दलीलें पेश कीं।

सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों को दोषी पाकर सजा और जुर्माने से दंडित किया है। जेल में बंद रिंकू को वीडियो कांफ्रेंस से सजा सुनाई गई और आरोपी मनोहर कोर्ट में हाजिर हुआ। उसे पुलिस अभिरक्षा में जेल भेजा गया है। आरोपियों पर जो जुर्माना किया गया है, उसके वसूल होने पर पूरी धनराशि पीड़िता को दिए जाने का आदेश दिया है। 

पुनर्वास को क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित करने के आदेश 
दुष्कर्म पीड़िता मंदबुद्घि किशोरी ने बेटे को जन्म दिया है। वह उसका पालन पोषण कर रही है। विशेष न्यायालय पाक्सो एक्ट के न्यायाधीश हर्षवर्धन ने पीड़िता के पुनर्वास को क्षतिपूर्ति धनराशि निर्धारित करने का आदेश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दिया है।

आदेश में कहा कि प्राधिकरण से जो क्षतिपूर्ति धनराशि  निर्धारित की जाएगी वह जिलाधिकारी को 30 दिन में किसी योजना व किसी निधि से देनी होगी। अगर कोई स्कीम या निधि नहीं है तो राज्य सरकार को निर्धारित क्षतिपूर्ति की धनराशि का भुगतान करना होगा। न्यायाधीश ने इस संबंध में जिलाधिकारी व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्णय की कॉपी भेजी है।
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