रामकरन के घर परिजनों को सांत्वना देने के लिए रिश्तेदार व मोहल्ले के लोग पहुंचे। महावीर ने बताया कि उसका पुत्र रामकरन पढ़ाई में होशियार था। बीएससी करने के बाद वह एलएलबी कर अधिवक्ता बनना चाहता था। आर्थिक स्थिति ठीक न होने से वह खुद लेखपाल के साथ काम कर अपने सपने को साकार करने में जुटा था।
रिश्ते लेकर आते थे आरोपियों के पिता
महावीर व आरोपियों के पिता एक शीतगृह में पल्लेदारी करते हैं। महावीर ने बताया कि आरोपी के पिता कई बार पुत्र रामकरन की शादी कराने के लिए लोगों को उनके घर लाए थे, लेकिन रामकरन गांव वालों के संपर्क के लोगों से शादी करना नहीं चाहता था।