इससे दावेदार अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने के लिए मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। इसके साथ ही शासन से अभी न तो वार्डों का आरक्षण तय हो सका है और न ही अध्यक्ष पद का। इससे दावेदार अभी अपनी जेब ढीली करने से कतरा रहे हैं।
उन्हें इस बात का डर है कि आरक्षण यदि उनके विपरीत हो गया तो खर्च किया धन बेकार चला जाएगा। फिलहाल दावेदार सोशल मीडिया पर खूब सक्रिय हैं। त्योहार हो या अन्य कोई अवसर, वह शुभकामनाएं देने से नहीं चूकते हैं। आरक्षण फाइनल होते ही चुनावी सरगर्मी तेज हो जाएगी।