कानपुर। विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत 29 मई से 12 जून तक कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के बीच जाकर नवीन तकनीकों की जानकारी दी। अभियान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से चलाया गया।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी जोन तीन के निदेशक डाॅ. एसके दुबे ने बताया कि किसानों से हुए संवाद के दौरान विभिन्न फसलों और कृषि क्षेत्र में अनुसंधान योग्य समस्याएं भी सामने आई।
मध्य उप्र के किसानों ने उड़द की हरी प्रजाति के बीज व मूंग में पीला रोग सहनशील बीज, खरीफ में तिल की पानी सहनशील प्रजाति और आलू, धान, गन्ना, करेला व खीरे की रोग रोधी प्रजातियों की जरूरत बताई। कृषि विज्ञान केंद्रों के 45 वैज्ञानिकों ने 2570 गांवों के किसानों से संवाद किया।