किसान मुआवजा मिलने का इंतजार करते रहे और चार लेखपाल गरीब काश्तकारों के 52 लाख रुपये हजम कर गए। यह सब तब हुआ जब जिलाधिकारी से लेकर तहसील स्तर पर एसडीएम तक मुआवजा वितरण पर नजरें जमाए थे। लेखपालों की करतूत की भनक इन अधिकारियों को लगी तक नहीं। एक रिटायर्ड फौजी की सक्रियता पर अधिकारियों ने जांच की तो भ्रष्टाचार सामने आया। हमीरपुर के सरीला एसडीएम ने चारों लेखपाल को निलंबित कर दिया है और तहसीलदार ने जरिया थाने में इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
वर्ष 2015-16 में आई प्राकृतिक आपदा में क्षेत्र के किसानों को कृषि निवेश अनुदान के तहत राहत राशि का वितरण नियमानुसार किए जाने के निर्देश जारी हुए। लेकिन मुआवजे के वितरण में भारी धांधली की गई। जिसकी आए दिन किसान शिकायतें भी करते रहे लेकिन अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। इधर, टोलारावत गांव निवासी रिटायर्ड फौजी हरचरन ने जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मुआवजे के वितरण की जानकारी मांगी, तो प्रशासन की भी आंखें खुलीं। गहराई से हुई छानबीन में धांधली दर परत दर खुलनी शुरू हो गई है।
अभी चार लेखपालों की जांच में 52 लाख से अधिक की धांधली उजागर हुई है। तहसील क्षेत्र में पांच करोड़ की धांधली की चर्चा है। लेखपालों पर नियम कानून ताक पर रखकर भूमिहीनों को बृहद किसान बताकर चेक बनाने का आरोप है। तहसीलदार मनोज कुमार ने बताया कि आरोपी लेखपालों ने मनमाने ढंग से चेक बनाकर सरकारी धन हड़पा है। कई बार चेकाें के भुगतान से संबंधित सूचना मांगी गई लेकिन लेखपालों ने जानकारी नहीं दी। तब उन्होंने बैंकों से जानकारी ली। चारों लेखपालों के विरुद्ध थाना जरिया में मामला दर्ज कराया गया है। एसडीएम रामसुरेश वर्मा ने बताया कि लेखपालों को निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। थानाध्यक्ष जरिया रामाश्रय यादव ने बताया कि तहसीलदार की तहरीर पर चाराें लेखपालों के विरुद्ध फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया गया है।