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सपा की हार...तो आशु पर वार: परिजन बोले- सुसाइड नोट की हो फोरेंसिक पड़ताल, सीएम योगी से निष्पक्ष जांच की मांग

Wed, 25 Oct 2023 06:24 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: आशु के पिता रामप्रकाश ने बताया कि सपा की मैनपुरी में हुई राजनीति हार का बदला लेने के लिए आशु पर यह आरोप लगाकर वार किया गया। आरोप लगया कि सपा के बड़े नेता आशु का राजनीतिक कॅरियर मिटाना चाहते थे। उन्होंने सीएम योगी से प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर के चकेरी गांव निवासी किसान बाबू सिंह ने सुसाइड नहीं किया था। उन्हें पीट कर रेलवे ट्रैक पर फेंका गया। इसके बाद फर्जी सुसाइड नोट तैयार कर साजिश के तहत आत्महत्या की कहानी गढ़ी गई। पुलिस को सच जानने के लिए सुसाइड नोट की फोरेंसिक जांच करानी चाहिए।

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यह बात सोमवार को प्रियरंजन आशु दिवाकर के पिता और भाई ने कही।  उर्मिला के अंतिम संस्कार के बाद आशु के पिता रामप्रकाश ने मीडिया को बताया कि उनका बेटा पहले उर्सला में सर्जन था। इसके बाद उसने राजनीति में कदम रखा। आशु ने तो बाबू सिंह के परिवार को बचाया, उन्हें जमीन वापस दिलाई थी।
उन्होंने कहा कि आशु को फंसाने के लिए विरोधियों ने सुसाइड नोट तैयार किया था। वहीं, आशु का बेटा आतिश रंजन बोला कि उनके पिता के नाम बाबू सिंह की जमीन का एक टुकड़ा नहीं है। अगर पुलिस निष्पक्ष जांच करे तो पिता भी जांच में पूरा सहयोग करेंगे।

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प्रियरंजन के वकील ने जांच पर उठाए सवाल
प्रियरंजन के अधिवक्ता सतनाम सिंह राजावत भी अंतिम संस्कार में पहुंचे। उन्होंने बताया कि नौ सितंबर के बाद पुलिस को इतना समय नहीं मिला कि सुसाइड नोट की फोरेंसिक जांच करा ले। अगर हैंडराइटिंग रिपोर्ट आ जाए, तो सब साफ हो जाएगा। कहा कि बाबू सिंह यादव ने मई 2023 में कोर्ट में एक वाद दाखिल किया था। इसमें खुद लिखा था कि उसे पढ़ना लिखना नहीं आता है। आरोप है कि जो पत्र लिखा गया उसे कई लोगों ने लिखा।

सपा की हुई हार तो आशु हुआ वार
आशु के पिता रामप्रकाश ने बताया कि सपा की मैनपुरी में हुई राजनीति हार का बदला लेने के लिए आशु पर यह आरोप लगाकर वार किया गया। आरोप लगया कि सपा के बड़े नेता आशु का राजनीतिक कॅरियर मिटाना चाहते थे। उन्होंने सीएम योगी से प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

पुलिस ने बच्चों पर दबाव बनाया, विरोध पर जड़ दिया था थप्पड़
आशु दिवाकर की फरारी के बाद पुलिस की एक टीम उसके घर में डेरा जमाए रही। टीम में एक महिला दरोगा के साथ दो महिला कांस्टेबल भी रही। टीम लगातार बुजुर्ग माता-पिता के साथ महिलाओं और बच्चों से पूछताछ कर रही थी। इससे बच्चे डिप्रेशन में आ गए। बच्चों पर दबाव बनाता देख आशु दिवाकर की बड़ी भाभी गीता ने विरोध किया, तो महिला दरोगा ने थप्पड़ जड़ दिया।

एक सप्ताह तक पुलिस ने घर में जमाया था डेरा, हर कॉल खुद करते थे अटेंड
यह आरोप गीता ने लगाए। गीता रंजन ने बताया कि महिला दरोगा और कांस्टेबल पूरे परिवार से अभद्र भाषा में बात कर रहे थे। उनकी पूछताछ के चलते ही आशु की पत्नी को माइनर अटैक पड़ गया था। इसके चलते उसे रिजेंसी में भर्ती कराया गया। इसके बाद स्टोन समेत अन्य दिक्कतें शुरू हो गईं। इसका एक निजी अस्पताल में एक सप्ताह तक इलाज चला।

नोटिस चस्पा होने की जानकारी ने ले ली सास की जान
आशु की भाभी रेनू के बताया कि सास उर्मिला आशु से बहुत प्यार करती थीं। उन्हें देखे बगैर नहीं रहती थीं। आशु के बारे में तमाम तरह की खबरें सुनकर वह पैनिक हुईं। उनकी सांस फूलने लगी। 19 अक्तूबर को उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया। दो दिन बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया। इस बीच घर पर कुर्की का नोटिस चस्पा होने की जानकारी ने उनकी जान ले ली।

बच्चों के पूछताछ के दौरान वर्दी भी है गैरकानूनी
अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश पांडेय ने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत किशोर से थाने में नहीं बल्कि उसके घर में ही पूछताछ की जानी चाहिए। पूछताछ के लिए पुलिस को वर्दी में नहीं, बल्कि सादे कपड़ों में जाना चाहिए। इससे किशोर असहज न महसूस करे। पूछताछ किशोर के परिजन या मोहल्ले के किसी संभ्रांत नागरिक की मौजूदगी में की जा सकती है। इस दौरान मारपीट करना गैरकानूनी है।

आशु एक बार मेरा हाथ पकड़ ले मैं फिर से खड़ी हो जाऊंगी
आशु दिवाकर की मां उर्मिला अंतिम समय में सिर्फ एक बार उसे देखना चाहती थीं। अपने आखिरी वक्त में उन्होंने परिवारवालों से कहा कि अगर आशु एक बार आकर मेरा हाथ पकड़ ले तो मैं फिर से खड़ी हो जाऊंगी...। परिवार वालों ने उन्हें बहुत समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह इस गम से उबर नहीं सकीं। आशु की बड़ी भाभी गीता रंजन ने बताया कि मां उर्मिला के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही थी।

परिवारवालों ने 30 घंटे तक किया आशु के लौटने का इंतजार
उन्होंने खाना पीना भी छोड़ दिया था। वह हर वक्त आशु की ही बात करती रहती थीं। उन्होंने बताया कि आशु पर पुलिस का बढ़ता दबाव और जमानत अर्जी खारिज होने की खबर से उनकी हालत और बिगड़ गई थी। वह अपने अंतिम क्षणों में सिर्फ आशु का ही इंतजार करती रहीं। वहीं, मोहल्लेवालों का कहना था कि अगर आशु निर्दोष था तो उसे अपना पक्ष रखना चाहिए था। वह भागा-भागा क्यों फिर रहा है। उसकी करनी का फल परिजनों को भुगतना पड़ रहा है।

सरेंडर का वीडियो बनवाकर किया वायरल
भाभी रेनू ने बताया कि पुलिस के दबाव के चलते घर में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे बीमार पड़ गए। आरोप है कि पुलिस ने आशु की पत्नी से आशु को सरेंडर करने और घर वापस आने की अपील करता वीडियो बनवाया। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
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जो कार्रवाई तय है वो तो होगी ही
परिवार वाले उर्मिला का अंतिम संस्कार कराने को तैयार नहीं थे। उन्होंने शर्त रखी कि जब तक आशु दिवाकर को जमानत नहीं मिल जाती वह अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इसपर एसीपी चकेरी अमरनाथ यादव ने परिवार वालों से कहा कि जो कार्रवाई तय है वह तो होगी ही। परिवार को यदि कोई बात रखनी है तो वह कोर्ट की शरण ले सकते हैं।
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