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एक चिंगारी ले गई मौत की ओर

Fri, 16 Dec 2016 07:49 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
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डेमो
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गांव देहात इलाकों में सर्दी की रातों में ठिठुरन से बचने के लिए लोग अक्सर अपने पास अलाव जला लेत हैं। लेकिन इसके साथ उन्हें सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है। दरअसल, अब तक कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिसमें सर्दी से बचने के लिए किया गया यह जुगाड़ घातक व जानलेवा बन गया है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के औरैया जिले का है।       
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औरैया जिला थानाक्षेत्र कोतवाली ग्राम कखावतु निवासी रामअवतार पाल(60) पुत्र गोकुल प्रसाद गुरुवार देर रात झोपड़ी के पास अलाव जलाकर सो गया। पास ही आठ बकरियां बंधी थीं।

रात लगभग एक बजे बकरियाें के पैर छटपटाने से अलाव की चिंगारी झोपड़ी के छप्पर पर पहुंच गई। इससे छप्पर में आग लग गई। झोपड़ी के पास बने घर में रह रहे ग्रामीण हरीबाबू तिवारी ने बताया कि रात लगभग एक बजे बकरियों के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनकर नींद टूट गई। छत की तरफ नजर गई तो आग की लपटें उठ रही थीं।
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बाहर निकलकर देखा तो झोपड़ी आग से घिरी थी। झोपड़ी के चारों तरफ कर्बी के दो सौ गट्ठर रखे थे। इससे झोपड़ी में आने जाने की जगह बेहद कम थी। शोरगुल सुनकर मोहल्ले के लोग उठ गए। सबमर्सिबल चलाकर आग पर पानी डाला जाने लगा। लगभग डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को बुझाया जा सका। इस बीच झोपड़ी में सो रहे रामऔतार का शरीर पूरी तरह से जल चुका था। पास ही आठ बकरियां मरी पड़ी थीं।
रामऔतार की मौत से परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल था। 

भाई के परिवार के साथ रहता था मृतक
रामऔतार ने शादी नहीं की थी। लगभग आठ साल पहले इनके बड़े भाई रामाधार की मौत हो गई थी। रामऔतार  रामाधार की पत्नी रामप्यारी, भतीजे संजय, राजू, अतुल, विपुल के अलावा भतीजी कुसुमलता व पूनम के साथ रहते थे। रामऔतार पशुओं को खरीदने व बेचने क ा व्यापार करते थे।  

बुवाई के लिए रखे रुपये जले 
रामऔतार के पास सवा दो बीघा जमीन थी। रुपयों के अभाव में अभी तक बुवाई नहीं हो पाई थी। दो दिन पहले धान बेचने पर आढ़त से चेक दी गई थी। चेक का अभी तक भुगतान नहीं हुआ था। गांव के अजय तिवारी, मुस्ताक, शमीम खां आदि ने बताया कि 15 दिसंबर को बकरियों को बेचकर खाद-बीज के लिए दस हजार रुपये के अलावा चार हजार रुपये पेंशन के निकालकर बुवाई का इंतजाम किया था। यह रुपये रामऔतार बनियान की जेब में रखे हुए थे। आग की चपेट में आने से रुपये भी जलकर राख हो गए।

दिसंबर में ही हुई थी बड़े भाई की मौत
रामऔतार के बड़े भाई रामाधार की आठ साल पहले 18 दिसंबर को बीमारी के चलते मौत हो गई थी।  रामऔतार की भी मौत 16 दिसंबर को होने से परिवारीजन दिसंबर महीने को अपने लिए अपशकुन बता रहे हैं।
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