मैं दुनिया के तमाम शहरों में घूमा हूं। तरह तरह के लोगों से मिला हूं। लेकिन, जो सुख, सुकून और प्यार कानपुर में मिलता है, वह और कहीं नहीं। मैं इस शहर के बाशिंदों के जीने की कला का कायल हूं।
यहां के मेहनतकश लोग अपनी खुशी का बहाना ढूंढ ही लेते हैं। यह कहना है जर्मनी के हैलीकॉप्टर व्यवसायी क्लाउस ईचीची का। क्लाउस जर्मनी के उल्म शहर में रहते हैं और हैलीकॉप्टर के कारोबार के सिलसिले में पिछले 20 साल से एचएएल कानपुर आ रहे हैं।
रविवार को छुट्टी वाले दिन वे शहर घूमने निकले तो अमर उजाला संवाददाता से मुलाकात हो गई। क्लाउस यहां के बदलावों को देखकर ‘वाह’ करने से नहीं चूके। घंटाघर से माल रोड, बड़ा चौराहा और लाल इमली तक की साफ सफाई, सड़कें, चौराहे, रंगे पुते डिवाइडर और सड़कों पर सफेद पट्टी देखकर बोले, हर बार यहां कुछ नया देखने को मिलता है।
‘अन्य शहरों के मुकाबले कानपुर ने तरक्की कम की। फिर अच्छा क्या?’ इस सवाल पर बोले, 20 साल में शहर ने बहुत तरक्की की है। शहर का दोगुना विस्तार हुआ है। नई इमारतें, नए स्थल, नई सड़कें पहले नहीं थीं। शहर में बहुत बदलाव हुए। फिर भी अगर कुछ नहीं बदला तो वो है शहर का अंदाज।
हैदराबाद और बंगलूरू के लोगों को एक दूसरे से मतलब नहीं, लेकिन यहां के लोग हाथ उठाकर एक दूसरे की खैरियत पूछते हैं। क्लाउस कहते हैं कि दुनिया भर में लोगों की खुशी का पैमाना कम हो रहा है। पैसा होने के बाद भी लोग उदास हैं, निराश है और अकेले हैं। यह स्थिति विदेशों में ही नहीं, भारत में भी है।
लेकिन कानपुर का हर शख्स खुश नजर आता है। जिस सड़क पर निकल जाता हूं, लोग खुद ब खुद मिलने आगे आ जाते हैं, हाथ मिलाते हैं, वे इंग्लिश भले ही न बोल पाते हों लेकिन हाव-भाव से पता चल जाता है कि वे मस्त हैं।