अनामिका नाम से सुप्रिया को नौकरी दिलाने वाला मास्टरमाइंड शिक्षक मामले को पेचीदा बनाना चाहता था। जब उसने यह भांप लिया कि अनामिका के दस्तावेजों की जांच हो रही है तो सुप्रिया को कार से अपने एक साथी के साथ इस्तीफा देने कासगंज भेज दिया।
जानकारी के मुताबिक सुप्रिया बा विद्यालय भी गई थी। शायद उसे वहां से कुछ जरूरी दस्तावेज लेने होंगे, लेकिन वहां से अन्य स्टाफ की वजह से कुछ निकाल नहीं सकी थी। इसके बाद जब वह इस्तीफा देने पहुंची तो स्टाफ ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
मास्टरमाइंड का साथी भाग गया था। मास्टरमाइंड शिक्षक इस्तीफा दिलाने में सफल हो जाता तो पुलिस का सुप्रिया तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता। पुलिस अन्य जिलों की तरह अनामिका के नाम की तलाश करती रहती और एक दिन मामला ठंडे बस्ते में चला जाता।
सफेद कार से चलता था मास्टरमाइंड शिक्षक
कासगंज में अनामिका नाम से रजपालपुर की सुप्रिया को नौकरी दिलाने वाले मास्टरमाइंड शिक्षक को गांव के कई लोग पहचानते हैं। वे बताते हैं कि शिक्षक इकहरे बदन वाला है व एक कंधा झुकाकर चलता है। दावा यह भी है कि उसका नाम भले ही राज उर्फ नीतू न हो, लेकिन वह कायमगंज बीआरसी में ही तैनात है।
वह मैनपुरी जनपद के भोगांव थाना क्षेत्र के गांव नगला खार का निवासी बताया गया है। मास्टर माइंड शिक्षक राज उर्फ नीतू का पहले से सुप्रिया के यहां आना जाना था। सुप्रिया के जेल जाने के बाद सोमवार को उसके पिता महिपाल सिंह जाटव कासगंज गए थे। उन्होंने बतायाकि सोरों कोतवाली पुलिस ने पुत्र को उनके सुपुर्द कर दिया। मंगलवार दोपहर वे गांव आ गए।
उन्होंने बताया कि वे व उनका परिवार मास्टरमाइंड शिक्षक को अच्छी तरह जानते हैं। सिर्फ नाम सही नहीं मालूम है। वह भोगांव के नगला खार का निवासी है। कासगंज पुलिस को भी उसके बारे अहम सुराग मिल गए हैं। वहां की पुलिस ने भी उसकी गिरफ्तारी के लिए जाल बुन दिया है।
रजपालपुर के लोगों की मानें तो वह गांव में सफेद कार से आता था। गलत नाम होने से उसका कोई सुराग नहीं लग रहा है। सूत्रों के मुताबिक अभी भी शिक्षक कायमगंज बीआरसी क्षेत्र में ही तैनात हैं। महिपाल सिंह ने बताया कि कासगंज जेल में वे अपनी बेटी से मुलाकात कर लौट आए हैं। दुखी मन से बताया कि बेटी की नौकरी के लिए भैंस बेचकर रुपये दिए थे। यह नहीं जाना था कि बेटी जेल चली जाएगी।
एक शिक्षिका के संपर्क में था शिक्षक
फर्रुखाबाद-कायमगंज रोड पर गांव दमदमा स्थित बा विद्यालय में तैनात एक शिक्षिका से भी मास्टरमाइंड शिक्षक का मेलजोल बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक वह अक्सर अपनी सफेद कार से उससे मिलने जाता और अकेले में बैठकर बात करता था। जब कोई अन्य शिक्षिका या गार्ड एतराज करता तो वह उनसे भी भिड़ जाता था।
यहां भी उसने अपना नाम नीतू उर्फ राज ही बताया था। सूत्रों के मुताबिक यहां तैनात रही शिक्षिका के दस्तावेजों में भी कुछ गड़बड़ी है। इसके चलते ही राज्य परियोजना निदेशक के आदेश पर शैक्षिक अभिलेखों की जांच के आदेश दिए जाने से हड़कंप मचा है। संबंधित शिक्षिका के अभिलेखों का सही से सत्यापन हो गया तो उसका फंसना भी तय बताया जा रहा है।
बा विद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों के कागजात तलब
नामिका शुक्ला का प्रकरण उजागर होने के बाद बा विद्यालय के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के अभिलेखों की दोबारा जांच होगी। इसके लिए जिला समन्वयक (बालिका शिक्षा) ने दो दिन के अंदर सभी अभिलेखों की छाया प्रतियां मांगी हैं। जिले में पांच कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय हैं। इनमें संविदा पर शिक्षक व कर्मचारी तैनात हैं।
अनामिका शुक्ला का प्रकरण सामने आने पर राज्य परियोजना निदेशक के आदेश पर पांचों बा विद्यालयों की वार्डनों, शिक्षकों, लेखाकार व अन्य कर्मचारियों के अभिलेख और आधार कार्ड की फोटो कॉपी कार्यालय में दो दिन में तलब की गई हैं। इससे अभिलेखों का दोबारा सत्यापन और आधार कार्ड पर अंकित विवरण का अभिलेखों से मिलान किया जा सके। दो दिन में अभिलेख उपलब्ध न कराने पर कार्रवाई की चेेतावनी भी दी है।