यूपी के इटावा जिले में सिविल लाइन पुलिस और क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा फर्जी आईपीएस अब तक लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर 60 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुका है। पुलिस ने बुधवार शाम उसे ग्वालियर बस स्टैंड से पकड़ा तो वहां भी रौब गांठ रहा था। पुलिस पूरे मामले में उसकी सिपाही पत्नी की भी भूमिका की जांच कर रही है।
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गुरुवार को एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने पुलिस लाइन के सभागार में पकड़े फर्जी आईपीएस अमित यादव उर्फ जोगेंद्र यादव पुत्र राजवीर सिंह निवासी धौंसाई थाना सिरसागंज को पत्रकारों के सामने पेश किया। एसएसपी ने बताया कि पुलिस को पिछले तीन दिनों से सूचना मिल रही थी कि एक व्यक्ति आईपीएस अधिकारी की वर्दी पहन कर अपनी कार से घूम रहा है।
उन्हाेंने सिविल लाइन व क्राइम ब्रांच की टीम को लगाया। बुधवार को उसे ग्वालियर बस स्टैंड से पुलिस ने पकड़ लिया। इस दौरान उसने पुलिस पर पहले रौब झाड़ते हुए दबाव बनाने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने जब सख्ती से पूछताछ की तो उसने स्वीकारा कि वह आईपीएस नहीं है। वह आईपीएस की वर्दी पहन कर लोगों को ठगने का काम करता है। उसने अपना नाम अमित पुत्र राजवीर सिंह निवासी धौसाई बताया।
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आईपीएस की वर्दी, दो मोबाइल, नेम प्लेट भी मिली
पुलिस और क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा फर्जी आईपीएस
- फोटो : अमर उजाला
तलाशी में पुलिस को उसके पास से उपनिरीक्षक का पहचान पत्र मिला है। इसमें उसकी भर्ती तिथि 2005 लिखी थी। इसके अलावा उसके पास से मिले आधार कार्ड में भी उसका नाम अमित कुमार निवासी जीएच-7 क्रॉसिंग रिपब्लिक गाजियाबाद लिखा था। आईपीएस की वर्दी, दो मोबाइल, नेम प्लेट भी मिली है।
एसएसपी ने दावा किया कि पूछताछ में अमित ने स्वीकार किया है कि अभी तक नौकरी दिलाने के नाम पर वह लोगों से करीब साठ लाख से अधिक रुपये ऐंठ चुका है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई के बाद जेल भेज दिया है। प्रेसवार्ता में एसपी सिटी रामयश सिंह एसपी क्राइम महेशअत्री सीओ सिटी वैभव पांडे भी मौजूद रहे। एसएसपी ने फर्जी आईपीएस को पकड़ने वाली टीम को दस हजार रुपए का इनाम दिया है।
जेल से छूटने के बाद वह 2014 में महिला सिपाही के संपर्क में आया
पुलिस और क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा फर्जी आईपीएस
- फोटो : अमर उजाला
एसएसपी अशोक त्रिपाठी ने बताया कि अमित उर्फ जोगेद्र सिंह शातिर किस्म का ठग है। वह करीब 13 साल से ठगी का काम करता आ रहा है। इससे 2007 में पहली शादी की थी। उसने ससुराल पक्ष को अपने अपने आपको सिपाही बताया था। जब ससुराल पक्ष को जानकारी हुई तो 2010 में उसका तलाक हो गया।
इस मामले की वह मैनपुरी जेल भी गया था। जेल से छूटने के बाद वह 2014 में महिला सिपाही के संपर्क में आया और उससे शादी कर ली उसने अपने आपको एसआई बताया था। बाद में उसने अपनी दूसरी पत्नी को बताया कि उसका चयन एसडीएम के पद पर हो गया। उसे मुरादाबाद में तैनाती मिली है।
पुलिस और क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा फर्जी आईपीएस
- फोटो : अमर उजाला
2016 में उसने आईपीएस में चयन होने की बात कही। वह ट्रेनिंग पर जाने की बात कहकर घर से बाहर रहा और ठगी करता रहा। एसएसपी ने बताया कि पूछताछ में उसकी महिला सिपाही पत्नी ने बताया कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
एसएसपी ने बताया कि फर्जी आईपीएस बनकर लोगों से ठगी करने वाले अमित की सहायता करने वालों की पहचान की जा रही है। इसके अलावा इस बारे में भी छानबीन की जा रही है कि उसने अब तक किन किन लोगों के साथ ठगी की है। उन्होंने बताया कि उसकी पत्नी की इसमें क्या भूमिका रही इसकी भी जांच की जा रही है। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ भी कर्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने बताया कि विभिन्न एप डाउनलोड कर आईपीएस की वर्दी में अपनी फोटो बनवाता था।