आयकर विभाग के नाम पर शहर के हाई प्रोफाइल कारोबारियों को फर्जी नोटिस भेजकर उनसे ठगी करने के प्रयास का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कारोबारियों को जो फर्जी नोटिस भेजे गए हैं, वे आयकर विभाग की ओर से भेजे गए नोटिसों से हूबहू मिलते हैं। मामले को सेटल करने के लिए नोटिस में दिए गए एक मोबाइल नंबर पर फोन करके कारोबारियों पर मिलने का दबाव बनाया जा रहा है।
कुछ कारोबारियों ने अपने जानने वाले अधिकारियों को फोनकर इस मुसीबत का हल पूछा तो मामले का खुलासा हुआ। इस प्रकरण से आयकर विभाग भी सकते में है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। आयकर विभाग के जांच निदेशालय ने बुधवार को शहर के सराफा, कपड़ा, मशीनरी समेत हर औद्योगिक और व्यापारिक संगठनों को बुलाकर फर्जी नोटिसों के प्रति आगाह किया है। अब छह कारोबारियों को फर्जी नोटिस भेजे जाने की बात पता चली है। माना जा रहा है कि बड़ी संख्या में कारोबारियों को नोटिस भेजकर उन्हें आसानी से ठगने का प्रयास किया गया। हालांकि अभी तक ठगी का कोई मामला सामने नहीं आया। नोटिस में दिए गए मोबाइल नंबर पर आयकर अफसरों ने संपर्क किया तो बंद आया। माना जा रहा है कि आयकर अफसरों के सतर्क होने की सूचना उन्हें पहले ही लग गई।
आयकर विभाग में पैठ रखने वालों पर शक
जांच निदेशालय के अफसरों का मानना है कि ठगी करने के प्रयास का यह नया अंदाज है। टैक्स से जुड़े और आयकर विभाग की हर गतिविधि जानने वाले लोग ही इस तरह का काम अंजाम दे सकते हैं। कारोबारियों को जो नोटिस भेजे गए हैं, उनके प्रारूप, भाषा शैली आयकर विभाग के प्रपत्रों से मेल खाते हैं। इसका मतलब है कि आयकर विभाग में पैठ रखने वाले, आयकर विभाग के पूर्व कर्मचारी या अधिकारी, चार्टर्ड एकाउंटेंट इसमें शामिल हो सकते हैं।
सराफा कारोबारी आसान टारगेट
आयकर विभाग के सूत्र बताते हैं कि नोटबंदी के दौरान सराफा कारोबारियों ने ही सबसे ज्यादा खेल किया। इस वजह से ज्यादातर नोटिस उन्हें भेजे गए। इसके पीछे यह सोच रही होगी कि सराफा कारोबारी आसानी से उनके शिकार बन जाएंगे।
नोटबंदी के बाद आयकर भेज रहा है नोटिस
दरअसल नोटबंदी के दौरान जिनके खातों में अप्रत्याशित रूप से नोट जमा हुए थे उन्हें नोटिस भेजकर आयकर विभाग उनकी आय का स्रोत पूछ रहा है। शहर में 10 हजार से ज्यादा अलग-अलग वर्गों के लोगों को आयकर विभाग ने नोटिस जारी किए थे। इसी आड़ में किसी शातिर गिरोह ने फर्जी नोटिस भेजकर ठगी का प्रयास किया।