फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खाकी पर सवाल: पुलिस का झूठ खुला, लूट का मोबाइल मिला, पढ़ें पूरा मामला

Mon, 28 Mar 2022 02:09 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर में एक मकान पर कब्जा व लूटपात के मामले में लूटे गए मोबाइल की बरामदगी के साथ एक महिला की गिरफ्तारी हुई है। इस मामले में एडीसीपी की जांच में लूट की वारदात साबित हुई है। वहीं, इसी मामले में तत्कालीन विवेचक एसीपी गोविंदनगर ने लूट की धारा ही हटा दी थी। इससे पुलिस महकमे पर सीधे सवाल खड़े हो गए हैं।
विज्ञापन
यूपी पुलिस - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बर्रा में दलित के मकान पर कब्जा व लूटपाट के मामले में एडीसीपी साउथ ने बड़ा खुलासा किया है। लूटा गया मोबाइल बरामद करने के साथ एक महिला को गिरफ्तार किया है। एडीसीपी की जांच में लूट की वारदात साबित हुई है। हैरानी की बात है कि इसी मामले में तत्कालीन विवेचक एसीपी गोविंदनगर ने लूट की धारा ही हटा दी थी।

विज्ञापन


इस कार्रवाई से तत्कालीन विवेचक पर सीधे सवाल खड़े हो गए हैं। बर्रा निवासी राजकुमार के मकान पर पुलिस ने दूसरे पक्ष का कब्जा कराया था। इसमें यादव मार्केट पुलिस चौकी के सभी पुलिसकर्मी लाइन हाजिर हो चुके हैं। मकान पर कब्जा होने से पहले आरोपी उमराव व उसके साथियों ने राजकुमार के घर में घुसकर मारपीट व लूटपाट की थी। 

उमराव समेत अन्य पर लूट व एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई थी। तत्कालीन विवेचक एसीपी गोविंद नगर विकास पांडेय ने केस से लूट की धारा हटा दी थी। इसलिए उनकी भूमिका की भी जांच चल रही थी।

विज्ञापन

वर्तमान विवेचक एडीसीपी साउथ मनीष सोनकर ने राजकुमार के घर से लूटा गया मोबाइल उमराव के परिचित घाटमपुर निवासी लोडर चालक की पत्नी के पास से बरामद कर लिया। रविवार देर रात महिला की गिरफ्तारी कर ली। जिस केस में एडीसीपी ने लूट की वारदात साबित कर दी।

मोबाइल बरामद कर आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया। उसी में एसीपी ने लूट का आरोप ही खारिज कर बगैर विवेचना पूरी किए लूट की धारा हटा दी थी। स्पष्ट है कि केस में मकान पर कब्जा कराने के लिए किस तरह से चौकी से लेकर ऊपर तक के लोग शामिल रहे। अब एसीपी पर विभागीय रूप से शिकंजा कसना तय है।
विज्ञापन

ये है पूरा मामला
बर्रा निवासी महादेव ने 2014 में उमराव से मकान बेचने की डील की थी। पूरी रकम न देने पर महादेव ने कब्जा नहीं छोड़ा था। उमराव ने महादेव पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। तब महादेव ने भी सिविल केस दायर कर दिया था। इस बीच दो साल पहले महादेव की मौत हो गई थी। तब से उनके बेटे राजकुमार केस के पैरवी कर रहे हैं। 23 फरवरी 2021 को उमराव ने मकान पर कब्जा कर परिवार को बेघर कर दिया था। इसके पहले घर में घुसकर उमराव व अन्य ने लूटपाट कर मारपीट की थी। इसी केस की विवेचना एडीसीपी कर रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें