एचबीटीअार्ई कानपुर में प्रदर्शन करते छात्र-छात्राएं
हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (एचबीटीआई) में स्पेशल कैरी ओवर एग्जाम (बैक पेपर) न होने और ईयर बैक लगने से नाराज स्टूडेेंटों ने बुधवार को प्रदर्शन किया। मुख्य गेट के बाहर धरना दिया। निदेशक प्रो. दिनेश बाबू शाक्यवार की कार गेट के बाहर रोक दी। इस कारण निदेशक, डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स प्रो. करुणाकर सिंह और डीन डॉ. डी परमार को पैदल ही दफ्तर जाना पड़ा।
पॉलिटेक्निक की पढ़ाई पूरी करके लेट्रल इंट्री से सीधे बीटेक सेकेंड ईयर और एमसीए सेकेंड ईयर में एडमिशन लेने वाले करीब 60 स्टूडेंट फेल हो गए हैं। इन सबको ग्रेस मार्क दिया गया लेकिन पास नहीं हो सके। इस कारण स्टूडेंटों ने स्पेशल कैरी ओवर एग्जाम कराने की मांग रखी। यह मामला कमेटी में रखा गया। 25 सदस्यीय कमेटी ने नफा-नुकसान का अध्ययन किया, फिर स्पेशल कैरी ओवर एग्जाम कराने से इंकार कर दिया। कमेटी ने कहा कि नियमों में ढील से शैक्षिक गुणवत्ता चौपट होगी। इस कारण स्टूडेंटों का ईयर बैक लगा। उन्हें सेकेंड ईयर की पढ़ाई ही करनी होगी। इसी मामले से नाराज स्टूडेेंटों ने प्रदर्शन किया है। बाद में निदेशक ने सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया, तब जाकर आंदोलन खत्म हो सका।
ग्रेस मार्क्स देने का नियम बदला
स्टूडेंटों की सुविधा को देखते हुए एचबीटीआई ने ग्रेस मार्क्स देने का नियम बदल दिया। निदेशक प्रो. दिनेश बाबू शाक्यवार का कहना है कि बीटेक की चार साल की पढ़ाई के दौरान एक स्टूडेंट को 40 मार्क्स का ग्रेस दिया जाता है। हर साल 10 मार्क्स का ग्रेस मिलता है। अब इसे च्वाइस बेस्ड कर दिया गया। स्टूडेंट चाहें तो एक साल की पढ़ाई के दौरान 40 मार्क्स का ग्रेस ले सकता है। एक सब्जेक्ट में 15 मार्क्स का ग्रेस भी मिल सकता है। अभी तक एक सब्जेक्ट में तीन मार्क्स का ग्रेस दिया जाता है। यह व्यवस्था सत्र 2016-17 से लागू की गई है।