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Kanpur News: खून में घुले भारी तत्वों की जांच के लिए जिले में उपलब्ध कराई जाए सुविधा

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कानपुर देहात। औद्योगिक क्षेत्र रनियां में दूषित हुए भूजल से लोगों के शरीर में घुल रहे क्रोमियम, मर्करी, फ्लोराइड जैसे भारी तत्वों के रोकथाम के लिए प्रमुख सचिव के साथ सोमवार को जिले के अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हुई। इसमें अधिकारियों ने रोकथाम के मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही भारी तत्वों की जांच करवाने के लिए जिले में जांच की सुविधा शुरू करवाए जाने की मांग की है। वहीं कचरा निस्तारण केंद्र पर डंप क्रोमियम की जांच कराने की बात कही गई।
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सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि क्रोमियम व अन्य भारी तत्वों से प्रभावित लोगों को बेहतर व विशेष चिकित्सा सेवा देने के लिए एनजीटी के निर्देश हैं। कानपुर देहात, कानपुर नगर व फतेहपुर तीनों स्थानों पर मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं लेकिन भारी तत्वों की जांच की व्यवस्था नहीं है। प्रभावित क्षेत्र के लोगों की जांच करवाने के लिए नमूने लेकर जांच के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट लखनऊ व एम्स रायबरेली भेजे जाते हैं। सैंपलिंग से लेकर रिपोर्ट आने में 25 से 30 दिन का समय लग जाता है।
इसके चलते जिला स्तर पर मेडिकल कॉलेज में शरीर में घुले भारी तत्वों की जांच करवाने में तेजी लाने के लिए संबंधित मशीनों की खरीद और संचालन के लिए बजट की मांग की गई। प्रमुख सचिव की ओर से जल्द ही बजट दिलवाने का आश्वासन दिया गया है। साथ ही प्रमुख सचिव की ओर से प्रभावित क्षेत्र में फसल व मवेशियों की भी जांच करवाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित क्षेत्र में पानी की व्यवस्था की भी जानकारी मांगी गई।
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जिलाधिकारी कपिल सिंह ने बताया कि क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में लोगों के पीने के पानी की व्यवस्था ठीक है। प्रत्येक घर में टोंटी के जरिए साफ पानी की सप्लाई की जा रही है। जिलाधिकारी ने बताया कि पूर्व में ही डंप स्थल के चारों ओर तारबंदी की जा चुकी है। पूर्व जिलाधिकारी की ओर से डंप स्थल के आसपास बाउंड्रीवॉल के निर्माण के लिए शासन को पत्राचार किया गया था जो कि लंबित है। इसपर प्रमुख सचिव की ओर से दोबारा एस्टिमेट बनाकर भेजने के निर्देश दिए गए जिससे डंपिंग स्थल पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण करवाया जा सके।


निस्तारण स्थल पर भी क्रोमियम के प्रभाव की जांच

जिलाधिकारी कपिल सिंह ने बताया कि खानचंद्रपुर में डंप क्रोमियम कचरा निस्तारण के लिए कुंभी स्थित निस्तारण केंद्र में लाया गया। ट्रीटमेंट के बाद भी कहीं क्रोमियम आसपास के क्षेत्र को प्रभावित तो नहीं कर रहा है इसकी जांच के लिए पूर्व में दो बार राज्य व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्राचार करवाकर जांच के लिए कहा गया है। निस्तारण केंद्र में डंप क्रोमियम की जांच को लेकर दोबारा से रिमाइंडर भेजा जाएगा। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि ट्रीटमेंट के बाद भी कहीं क्रोमियम अपना प्रभाव तो नहीं छोड़ रहा है।
16 मार्च से लिए जाएंगे लोगों के रक्त व पेशाब के नमूने

सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में करीब एक माह से लोगों के शरीर में भारी तत्वों की जांच नहीं हो पा रही थी। वर्तमान समय में लोगों में मर्करी का प्रभाव कम देखने को मिल रहा है जबकि क्रोमियम प्रत्येक व्यक्ति में मानक से आंशिक रूप से अधिक पाया जा रहा था। नोडल अधिकारी डॉ. आशीष बाजपेई की देखरेख में 16 मार्च से क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में अभियान चलाकर 120 लोगों के नमूने लिए जाएंगे। क्रोमियम व मर्करी की जांच के लिए नमूनों को डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट लखनऊ भेजा जाएगा जबकि फ्लोराइड की जांच एम्स रायबरेली से करवाई जाएगी।
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