सड़क के किनारे लगी गब्बर सिंह की चक्की के सामने उसको उसके ही गांव के शंकर सिंह, मलोल सिंह, रणवीर सिंह पुत्रगण साहब सिंह व नरेंद्र सिंह, राजू सिंह, भगवान सिंह एवं गब्बर सिंह पुत्रगण दशरथ सिंह तथा कल्लू सिंह पुत्र अरविंद सिंह ने घेरकर गोलियों से भून दिया। साहब सिंह और दशरथ सिंह आपस में भाई हैं।
रंजिश की पृष्ठभूमि में बताया गया कि शिशुपाल सिंह के पिता वीरेंद्र सिंह की चार आरोपियों ने हत्या की थी। इसमें शिशुपाल सिंह चश्मदीद गवाह था तथा कोर्ट में अगले दिन गवाही होनी थी। इस पर ही गवाह को सदा के लिए शांत कर दिया गया। हत्या का यह मुकदमा आरोप पत्र के बाद जनपद न्यायालय सुशील कुमार की कोर्ट में चला।
अभियोजन की ओर से डीजीसी अभिषेक मिश्रा व वरिष्ठ अधिवक्ता हृदय नरायन पांडेय ने कहा कि पिता की हत्या के मामले में गवाही न हो जाए, इसलिए नियत तिथि से एक दिन पहले शिशुपाल सिंह की हत्या कर दी गई। यह अपराध समाज की न्यायिक व्यवस्था को ध्वस्त कर देने वाला अपराध है, इसलिए इन सभी लोगों को कठोर दंड देने की वकालत की।
बचाव पक्ष ने इन्हें निर्दोष बताया। दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार ने सभी आठों दोषियों को उम्रकैद व एक लाख 57 हजार प्रत्येक पर अर्थदंड लगाया है। अधिवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि अधिरोपित अर्थदंड में से 50 प्रतिशत राशि बतौर मृतक शिशुपाल सिंह की माता को देय होगी। अर्थदंड की वसूली राजस्व वसूली की तरह की जाएगी।