कानपुर। बिजनौर में मारे गए एनआईए डिप्टी एसपी तंजील अहमद की हत्या के सुराग पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज से मिलने के बाद ‘अमर उजाला’ ने शहर की बाजारों की सुरक्षा व्यवस्था को परखा और व्यापारियों के दर्द को भी सुना। पड़ताल से पता चला कि प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरों से बस अपनों (कर्मचारी और ग्राहक) की ही निगहबानी की जा रही। कैमरे रोड को कवर करने में फेल पाए गए।
घंटाघर से मूलगंज चौराहे को जोड़ने वाली हालसी रोड पर चार सौ मीटर के फासले पर तीन थाने हैं। हार्डवेयर, पेंट, लोहा, चूना, सेनिटरी, जूता - चप्पल , खाद्य सामग्री, मसाले आदि की दुकानों के अलावा थोक सब्जी मंडी होने की वजह से शहर और आसपास के कस्बों के कारोबारियों का यहां आना जाना रहता है। यहां सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। बेशक कुछ व्यापारियों ने अपनी दुकान में सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे हैं। इन कैमरों से व्यापारी अपनी दुकान में काम करने वाले स्टाफ और ग्राहकों पर ही नजर रख सकते हैं। ये कैमरे सड़क को कवर नहीं कर पाते। रात के वक्त प्रतिष्ठानों की सुरक्षा चौकीदारों के भरोसे रहती है। व्यापारी सुरक्षा के मुद्दे पर पुलिस से भी नाखुश दिखे। पूर्व पार्षद अनुज गुप्ता नेे बताया कि हालसी रोड पर दुकानों में चोरी, टप्पेबाजी की घटनाओं के अलावा वाहनों पर भी चाेर आंख लगाए रहते हैं। उन्होंने बताया कि बातचीत में व्यापारी सीसीटीवी की जरूरत को महसूस तो करते हैं लेकिन कैमरे लगवाने के मुद्दे पर एकमत नहीं है।
सीसीटीवी लगवाने का खर्च
डीवीआर: सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग को स्टोर करने के लिए डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकार्डर) की जरूरत होती है। यह पूरे सेटअप की सबसे महंगी डिवाइस है। चार पोर्ट का डीवीआर 5000 रुपये, आठ पोर्ट का डीवीआर 8000 रुपये व 16 पोर्ट का डीवीआर 10500 रुपये में उपलब्ध है। डीवीआर में हार्ड डिस्क होती है, जिससे स्टोर करने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। एक टेराबाइट की हार्ड डिस्क 3600 रुपये व चार पोर्ट के कैमरे की रिकार्डिंग मे15 दिन का बैकअप होता है।