कानपुर। शहर में टीबी (क्षयरोग) का स्वरूप बदल रहा है। अब यह केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रही बल्कि, शरीर के अन्य अंगों हड्डी, पेट और दिमाग तक पर हमला कर रही है।
लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने के कारण एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले तीन वर्षों में रोगियों में 27 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए सौ दिन के अभियान में रोगियों का बढ़ा हुआ आंकड़ा सामने आया है।
आमतौर पर टीबी को फेफड़ों की बीमारी माना जाता है, लेकिन जब टीबी के बैक्टीरिया खून या लिम्फ के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों जैसे हड्डियों, पेट, दिमाग या किडनी तक पहुंच जाते हैं, तो इसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहा जाता है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन सालों में टीबी रोगियों के अलावा एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के रोगियों की संख्या बढ़ी है। 2023 में टीबी के 15374 (एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी-6688), 2024 में 16174 (7440) 2025 में 17027(8498) रोगी मिले हैं। विभाग की ओर से चलाए गए अभियान में पता चला कि रोगी को टीबी थी, इलाज कराया और ठीक हो गया, लेकिन उसके बाद भी बुखार आता रहा। जांच में फेफड़ों में टीबी नहीं निकली। दोबारा जांच कराने पर किसी के रीढ़ में तो किसी के लिम्फ नोड (गले की गांठ) में टीबी पाई गई। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुबोध प्रकाश ने बताया कि टीबी रोगियों को चिह्नित करने में हम आगे हैं। हमने 100 दिन चलाए गए सर्वे में लक्ष्य प्राप्त किया और रोगियों की जांचकर इलाज शुरू कराया।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग के डॉ. संजय कुमार के अनुसार, खराब जीवनशैली, प्रदूषण और कुपोषण की वजह से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है, जिससे बैक्टीरिया फेफड़ों से बाहर निकलने में सफल हो जाते हैं। कानपुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संक्रमण का प्रसार तेजी से होता है। सबसे ज्यादा मामले लिम्फ नोड (गले की गांठ) की टीबी के आ रहे हैं। इसके बाद हड्डियों (खासकर रीढ़ की हड्डी) और पेट की टीबी के मामले देखे जा रहे हैं। महिलाओं में इनफर्टिलिटी (बांझपन) का एक बड़ा कारण गर्भाशय की टीबी बन रहा है।
लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच
= शरीर के किसी हिस्से (जैसे गर्दन) में गांठ होना।
= हड्डियों या जोड़ों में लंबे समय से दर्द।
= शाम के समय हल्का बुखार और वजन का लगातार गिरना।
= पेट में सूजन या पाचन संबंधी पुरानी समस्या।