कानपुर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के एलान का असर तेजी से दिखने लगा है। शहर के निर्यातकों के 500 करोड़ के नए ऑर्डर निरस्त कर दिए गए हैं। इस संबंध में अमेरिकी खरीदार ई-मेल भी भेजने लगे हैं। क्रिसमस के बाजार पर भी संकट हो गया है। इस दौरान ही सबसे ज्यादा निर्यात किया जाता है। इसके कंसाइनमेंट अगस्त-सितंबर में ही भेजे जाते थे। वहीं, पुराने ऑर्डर 28 अगस्त तक 25 प्रतिशत और पूर्व के शुल्क के साथ भेजे जा सकेंगे। निर्यातकों का कहना है कि चमड़ा उद्योग सरकार के साथ है। नए बाजार तलाशे जाएंगे। हालांकि, ऑर्डर निरस्त होने से 20-25 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित हुआ है।
दरअसल टैरिफ लगने से पूर्व अमेरिका में कानपुर समेत भारत से जाने वाले चमड़ा और चमड़ा से जुड़े उत्पादों पर अलग-अलग 6-11 प्रतिशत तक का शुल्क लगता था। भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय समझौता होने से ये शुल्क शून्य होने की संभावना बन रही थी लेकिन अचानक ट्रंप ने पहले 25 प्रतिशत शुल्क लगाया जो सात अगस्त से प्रभावी हो गया है। इसके अलावा 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है जो 28 अगस्त से प्रभावी हो जाएगा। 28 अगस्त के बाद यदि कोई निर्यात ऑर्डर शहर से जाएगा तब 56-61 प्रतिशत तक शुल्क लगेगा। इसमें 50 प्रतिशत टैरिफ के अलावा पूर्व में 6-11 प्रतिशत शुल्क शामिल रहेगा। जानकारों का कहना है कि 100 करोड़ के अग्रिम ऑर्डर पहले ही रोक दिए गए थे। इस बीच अमेरिकी खरीदारों ने 25 प्रतिशत शुल्क लगने पर मोल भाव भी शुरू किया था लेकिन 50 प्रतिशत टैरिफ लगने के बाद केवल ऑर्डर निरस्त के संबंध में ही पत्राचार किया जा रहा है।
क्रिसमस के लिए अगस्त-सितंबर में ही सबसे ज्यादा निर्यात ऑर्डर मिलते थे और कंसाइनमेंट भेजे जाते थे। क्रिसमस पर सबसे ज्यादा उत्पादों की बिक्री अमेरिका में होती है। कारोबारियों का कहना है कि कानपुर के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार रहा है। पिछले साल करीब 17-22 प्रतिशत निर्यात अकेले अमेरिका को किया गया था। कानपुर के चमड़ा उत्पाद के साथ ही फुटवियर की अमेरिका में बहुत अच्छी मांग रहती है। वहां सालाना 1800-2000 करोड़ का निर्यात किया जाता है। निर्यातकों के अनुसार वे प्रतिनिधिमंडल के साथ रूस और अफ्रीकी देशों की ओर रुख करेंगे।
500 करोड़ के नए निर्यात ऑर्डर अमेरिकी खरीदारों ने निरस्त कर दिए हैं। इस संबंध में ई-मेल आ रहे हैं। चमड़ा और टेक्सटाइल उद्योग पर खासा असर पड़ रहा है। अब टेक्सटइल फैब्रिक्स के लिए जापान की कंपनियों से बातचीत शुरू कर दी गई है। पहले यह अमेरिका से आयात होता था।
आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन (फियो)।
चमड़ा निर्यातक सरकार के साथ खड़े हैं। निर्यात ऑर्डर हर दिन निरस्त हो रहे हैं। इसके चलते उत्पादन प्रभावित हो रहा है लेकिन जल्द ही इस संकट से उबर जाएंगे। सरकार उद्योग हित में काम कर रही है। रूस, यूरोपीय यूनियन, यूएई, ओमान, अफ्रीकी देशों के साथ कारोबारी रिश्ते और गहरे किए जाएंगे। जल्द ही इन देशों में प्रतिनिधिमंडल जा सकेगा।
असद इराकी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद