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तनावग्रस्त चौकी इंचार्ज ने पत्र में बयां किया दर्द, एसएसपी ने लिया एक्शन तो पुलिस विभाग में हलचल 

Sun, 14 Oct 2018 12:25 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- उत्पीड़न करने के लिए मशीन की तरह 16 से अधिक घंटे काम लिया जा रहा है जिससे प्रार्थी तनावग्रस्त है।
-उत्पीड़न स्वरूप ही कभी थाने का चार्ज नहीं दिया गया। जबकि प्रार्थी की सेवा संतोषजनक, उत्तम और अति उत्तम होने के साथ ही सराहनीय है। 
-उत्पीड़न स्वरूप ही ट्रांसफर नीति का उल्लंघन करते हुए एक साल में सात बार किया गया। 
 
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विस्तार
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यूपी के कानपुर महानगर में पुलिस विभाग के एक चौकी इंचार्ज ने शोषण का आरोप लगाया है। शिकायती पत्र एसएसपी अनंत देव के पास पहुंचते ही विभाग में हलचल मच गई। 

कानपुर के नवाबगंज थाने की गंगा बैराज चौकी इंचार्ज अशोक कुमार ने अपना दर्द बयां करते हुए अधिकारियों को पत्र लिखा है। पत्र में अशोक ने लिखा कि- 'साहब! मुझे लाइन हाजिर कर दिया जाए या पुलिस ऑफिस से संबद्ध कर दें। 24 साल से पुलिस विभाग में मेरा शोषण हो रहा है। चौकी इंचार्ज होने के बावजूद मुझे एक भी हमराही नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते करीब दो दर्जन जांचें (विवेचनाएं) प्रभावित हैं। सजा के तौर पर स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करते हुए मेरा एक साल में सात बार ट्रांसफर किया गया। सीनियर होने के बाद भी जूनियर के अंडर में काम करने से मानसिक तनाव में हूं।' पत्र मिलते ही एसएसपी अनंत देव ने तत्काल प्रभाव से अशोक कुमार को रिजर्व पुलिस लाइन भेज दिया। इसके साथ ही मामले की जांच शुरू करा दी है।  

पत्र में चौकी इंचार्ज अशोक ने यह भी लिखा कि उत्पीड़न करने के लिए मशीन की तरह 16 से अधिक घंटे काम लिया जा रहा है जिससे प्रार्थी तनावग्रस्त है। उत्पीड़न स्वरूप ही कभी थाने का चार्ज नहीं दिया गया। जबकि प्रार्थी की सेवा संतोषजनक, उत्तम और अति उत्तम होने के साथ ही सराहनीय है।  उत्पीड़न स्वरूप  ही ट्रांसफर नीति का उल्लंघन करते हुए एक साल में 7 बार किया गया। 

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प्रार्थी की 13 साल की नौकरी पूरी होने के बाद भी प्रथम प्रोन्नत वेतनमान व निरीक्षक पद का वेतन नहीं दिया जा रहा है। वेतन विसंगतियों समेत अन्य मामलों की कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। आठ घंटे की ड्यूटी होने के बाद भी 16 घंटे की नौकरी और विषम परिस्थितियों में 24 घंटे ड्यूटी ली जा रही है। कार्यस्थल पर कूलर, पंखा, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाएं नहीं देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। सरकारी कार्य में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई मिलती है लेकिन उल्लेखनीय कार्य में कभी प्रोत्साहन नहीं मिला।
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