पाठकों के सवालों का जवाब देते विशेषज्ञ
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रात में बस करवटें बदलते रहते हैं और नींद नहीं आती है। इससे अगला पूरा दिन आलस वाला रहता और काम में मन नहीं लगता है, समझ नहीं आता है क्या करूं...कुछ ऐसे सवाल पाठकों ने रविवार को विशेष कॉलम मेरी उलझन के तहत फोन पर विशेषज्ञों से किए। अमर उजाला कार्यालय में मौजूद एएनडी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. संगीता श्रीवास्तव और सेंट्रल साइकेट्रिक सोसाइटी के महासचिव वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. गणेश शंकर ने उन्हें तनाव कम करने और दिनचर्या सुधारने के साथ ही काउंसलिंग की सलाह दी। इस दौरान बहुत से लोगों ने अपनी परेशानियां साझा कीं। रोगियों के घरवालों ने बताया कि बच्चों की शादी में रुकावट न आए, इससे बीमारी छिपाते हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी कि मानसिक हो या शारीरिक दिक्कत कभी छिपाएं नहीं। डॉक्टर को बताएं, इलाज लें तो रोग ठीक होगा। छिपाने से समस्या और बढ़ती जाती है।
रात में नींद नहीं आती और पूरा दिन आलस आता है। उलझन भी बनी रहती है क्या करें। - पाठक
अनिद्रा की समस्या किसी कारणवश हो सकती है। जब दिमाग तनावग्रस्त होता है तब नींद नहीं आती। इसके लिए पहले एक पेन और पेपर लें। उसमें अपनी समस्या लिखें और देखें कि वह कैसे दूर होगी। इसके अलावा समस्या दूसरों से साझा करें। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि जब रात में नींद न आए तो बिस्तर पर लेटे-लेटे करवटें न बदलें। अगर लेटने के 15-20 मिनट बाद नींद नहीं रही है तो उठ जाएं। कोई किताब पढ़ें। टहलें, व्यायाम करें और खुद को थकाने वाला काम करें। जैसे ही नींद आने लगे तो तुरंत सो जाएं। रात में गरिष्ठ भोजन न करें। चाय-कॉफी-कोल्डड्रिंक न पीएं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हूं, हमेशा लगता है जैसे कि कुछ छूट रहा है क्या करें। - पाठक
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों में डर रहता है। आपका डर बता रहा है कि यह अवसाद की शुरुआत है। अवसादग्रस्त दिमाग में नकारात्मक विचार आते हैं। एक तरीका है जिससे अवसाद दूर भगाया जा सकता है। इसके लिए रोज रात में सोने से पहले अपने रब को याद करें और उनसे कहें कि मैं डरा हुआ हूं। मुझे इस डर से निकालिए। मन से प्रार्थना करते हुए यह महसूस करिए कि आपके मन से नकारात्मक विचार निकल गए। इसके लिए आपको खुद से विश्वास दिलाना होगा कि आप बहुत अच्छे से जीवन जी रहे हैं।
घर में कोई बीमार है या अचानक कोई दुर्घटना हो जाती है तो धड़कन बहुत तेज हो जाती है, क्या करें। - पाठक
कोई घर में बीमार है या तनावपूर्ण स्थिति है तो घबराना या डरना सामान्य प्रक्रिया है। जैसे कोई कहता है कि ऊंचाई से डर लगता है या तेज आवाज से डर जाते हैं। ये सामान्य है। इसके अलावा हर तरह के डर आपके दिमाग से पैदा किए हुए हैं। इसलिए परिस्थिति कोई भी हो सिर्फ सकारात्मक सोचें।
बंद जगह जैसे लिफ्ट में जाता हूं तो अचानक से घबरा जाता हूं, क्या करूं। - पाठक
बंद जगह पर जाने के बाद डर लगने को क्लास्टोफोबिया कहते हैं। इसमें रोगी अगर लिफ्ट में जाएगा तो जाते ही मन में तरह-तरह के विचार आने लगते हैं। जैसे अचानक लिफ्ट बंद हो गई तो मैं कहीं इसमें फंस न जाऊं, लिफ्ट में आग न लग जाए, लिफ्ट अपने आप से गिर न जाए। इस तरह के विचार आते रहते हैं। इनसे बचने के लिए लिफ्ट में जाते ही मन को शांत रखें और सोचें कि लिफ्ट से आराम से नीचे उतर जाएंगे और कुछ नहीं होगा। ऐसा ही जीवन के हर मोड़ पर जब नकारात्मक विचार आएं तो सोचें। इससे आपमें बदलाव आएगा।
बेटे से मेरी बनती नहीं है। मैं उससे कुछ कहूं और वह उसे कुछ और समझता है इससे दूरियां बढ़ रही हैं। क्या करें। - पाठक
बच्चे व पिता में मनमुटाव है तो संवाद स्थापित करें। बदलते वक्त में बच्चों की मनोदशा समझें। बदलते परिवेश में उनकी पसंद नापसंद जानना आवश्यक है। इसके लिए उससे बात करें। एक सिस्टम घर में बनाएं कि महीने के पहले रविवार को पूरा परिवार साथ मीटिंग करे और जिसे जो समस्या हो वह बताए। इससे आपस में बात भी होगी और एक दूसरे को समझा भी जा सकेगा।
बेटे को ओसीडी है। उसकी शादी में दिक्कत न हो, इससे बताते नहीं, क्या यह रोग ठीक हो जाता है।- पाठक
यह रोग बिल्कुल ठीक हो जाता है। कोई समस्या छिपाने की कतई जरूरत नहीं है। डॉक्टर को जाकर दिखाएंगे तभी तो इलाज मिलेगा। इसके लिए साइको थैरेपी की जरूरत पड़ती है। रोग अगर अधिक बढ़ा होगा तो इलाज लेना पड़ेगा। तनाव न लें। हां, इसका इलाज थोड़ा लंबे समय तक चलता है।
बार-बार हाथ धोता हूं, फिर भी लगता है कि गंदा है, ऐसा क्यों होता है।- पाठक
इस समस्या को ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिस्ऑर्डर (ओसीडी) कहते हैं। यह बहुत कॉमन समस्या है। इसमें व्यक्ति के मस्तिष्क में एक विचार घर बना लेता है। इससे धोने के बाद भी गंदगी महसूस होती है। विचार को सहजता से लेना चाहिए। विशेषज्ञ को दिखाएं। काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर दवा से यह बिल्कुल ठीक हो जाती है।
पत्नी का मिजाज कभी बहुत उग्र और कभी बहुत सुस्त हो जाता है, क्या करें।- पाठक
इसे मैनिएक डिप्रैसिव साइकोसिस कहते हैं। इसमें व्यक्ति का मिजाज बदलता है। कभी बहुत सुस्त हो जाएगा और कभी अचानक उग्र हो सकता है। दवाओं के साथ साइको थैरेपी कराएं। इस बीमारी के इलाज में काउंसलिंग की बड़ी भूमिका होती है। मर्ज नियंत्रित हो जाता है। इसमें परिवार का सहयोग बहुत जरूरी होता है। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि रोगी दवाएं न छोड़े।