लोकसभा चुनाव में कालेधन के प्रवाह को रोकने के लिए आयकर विभाग ने इस बार कड़ी तैयारी की है। सड़क मार्ग और हवाई अड्डों पर नजर रखने के अलावा तकनीक का सहारा भी लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि चुनाव में यदि किसी व्यक्ति का कालाधन इस्तेमाल होता हुआ पाया गया तो मुकदमा तक दर्ज कराया जाएगा।
आयकर विभाग के सूत्र बताते हैं कि प्रत्याशियों के लिए चुनाव में खर्च की सीमा 70 लाख रुपये निर्धारित की गई है, लेकिन धन इससे ज्यादा खर्च होता है। कई प्रत्याशी तो कई गुना अधिक तक खर्च करते हैं। यह अतिरिक्त खर्च प्रत्याशियों के सहयोगी उठाते हैं। हालांकि इसे पता लगा पाना कठिन होता है लेकिन इस बार इसे पता लगाने के कई तरह से इंतजाम किए गए हैं।
चुनाव में कालेधन का इस्तेमाल न करने की चेतावनी
अप्रत्याशित लेनदेन का पता लगाने के लिए कई तरह के सॉफ्टवेयर भी सक्रिय हैं। जमीनी स्तर पर भी टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि कौन व्यक्ति किस प्रत्याशी के पक्ष में पैसा खर्च कर सकता है। आयकर विभाग के सूत्र बताते हैं कि मुकदमा जैसी कार्रवाई के लिए उन लोगों को चुना जाएगा जो धन का गलत तरीके से इस्तेमाल करते हुए चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे।
ऐसे लोगों के यहां सर्वे और छापे की भी कार्रवाई की जा सकती है। बीते वर्षों के रिटर्न के साथ ही कारोबार की स्थिति समेत कई तरह की जांचें संभव हैं। आयकर अफसरों ने चुनाव में कालेधन का इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी है।
आयकर चला सकता है मुकदमा
यदि कोई व्यक्ति कालाधन रखने के बावजूद उसे स्वीकार नहीं करता है, अथवा आय से अधिक संपत्ति का हिसाब नहीं दे पाता है। कर चोरी में लिप्त रहता अथवा कर चोरी करने वालों का साथ देता है तो उस पर आयकर विभाग अभियोजन चला सकता है।
अभियोजन चलाने से पहले प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त से अनुमति लेना जरूरी होता है। इस तरह का मुकदमा आयकर अधिनियम की धारा 276, 276(क), 277(क) आदि के तहत दर्ज होता है। इसमें छह महीने से सात साल तक सजा का प्रावधान है।