इसके बाद जब भी खानपान बिगड़ा, मोटापा बढ़ा, लाइफ स्टाइल खराब हुई और तनाव बढ़ा तो वे डायबिटिक हो जाते हैं। अगर प्री डायबिटिक स्टेज में ही खानपान में सुधार कर लिया जाए तो डायबिटिक होने से बचा जा सकता है। इसके अलावा ताजा आंकड़ों के मुताबिक में कोरोना काल के बाद डायबिटीज के 20 फीसदी रोगी बढ़ गए हैं। इनमें ज्यादातर वे लोग हैं जो प्री डायबिटिक थे और कोरोना हो गया। स्टीरॉयड के सेवन और संक्रमण के कारण वे स्थायी रूप से डायबिटीज के रोगी हो गए गए हैं। डायबिटीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी का कहना है कि लोग डायबिटीज को लेकर जागरुक नहीं है। जब बहुत दिनों तक ब्लड शुगर लेवल बढ़ा रहता है तो इलाज कराते हैं।
आंकड़े
शहर में डायबिटीज के रोगी- पांच लाख
प्री डायबिटिक रोगी- 10 लाख
6 महिलाओं में प्रसव बाद डायबिटीज- दो लाख
कोरोना के बाद डायबिटीज- एक लाख
एडवाइजरी
- ब्लड शुगर की जांच करा लें।
- नियमित व्यायाम करें, पैदल चलें।
- आरामतलबी की लाइफ स्टाइल छोड़ दें।
- प्री डाबिटिक स्टेज होने पर परहेज शुरू कर दें।
- खानपान संयमित रखें।
- नाश्ता पेट भर करें, डिनर को हल्का रखें।
- पूरी नींद लें, सोने के पहले मोबाइल फोन न देखें।