दोनों आरोपी यहां किराए पर रह रहे थे। आरोपियों ने पुलिस पूछताछ बताया कि वह लोगों को निशुल्क पैन कार्ड बनवाने का लालच देकर उनसे उनका आधार कार्ड व वोटर आईडी कार्ड आदि महत्वपूर्ण प्रपत्र ले लेते थे। कंप्यूटर, लैपटॉप व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से उनके हस्ताक्षर व अंगूठे का निशान लेकर पासबुक, एटीएम कार्ड व अन्य दस्तावेज साइबर अपराधियों को बेच देते थे। इसके एवज में उन्हें 50,000 से 1,00,000 रुपये की मोटी रकम मिलती थी। वह रकम आपस में बांट लेते थे। इसके अलावा प्रमोशन के लिए शेयर बाजार की कई ब्रोकर एजेंसियां भी डीमेट खाते खोलने के लिए कमीशन देती हैं। प्रति खाते उन्हें 800 रुपये मिलते थे।
थानाध्यक्ष बेचन सिंह ने बताया कि आरोपी कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाते थे। इन लोगों की बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड आदि का ब्योरा लेकर साइबर अपराधियों को बेच देते थे। एसओ ने बताया कि रैकेट में गुजरात और दिल्ली के लोगों के शामिल होने की जानकारी भी मिली है। पता किया जा रहा है। तीनों आरोपियाें पर धोखधड़ी, ठगी व आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया।
यह सामान हुआ बरामद
1061 सिम कार्ड, 1061 आधार कार्ड के अपडेशन फार्म, 12 आधार कार्ड,11 डेबिट व क्रेडिट कार्ड, एक पाॅकेट क्यूआर कार्ड, पांच वोटर आईडी कार्ड, छह बैंक की पासबुक, दो बैंक चैकबुक, 46 पेनकार्ड, दो लैपटॉप, दो सीपीयू, एक मॉनीटर, तीन राउटर, तीन मॉडेम, एक फिंगर प्रिंट स्कैनर, दो माउस एक की-बोर्ड, तीन ऐडप्टर, एक यूएसबी जीपीएस रिसीवर, एक हार्ड डिस्क, एक एसएसडी, एक फोन पे एमाउंट रिसीवर, पांच कनैक्टिंग केबिल, तीन ऐडप्टर चार्जर, दो इंटरनेट केबिल, एक ओएनयू , सात मोबाइल फोन, एक फोर पिन बोर्ड, 500 ब्लैंक वोटर कार्ड व एक गूगल पे एमाउंट पाॅकेट क्यूआर बरामद किया।
एक-एक लाख में बेचते थे लोगों के खाते
एसओ बेचन सिंह ने बताया कि आरोपी लोगों को मुफ्त में फ्री पैन कार्ड बनवाने का लालच देते थे। वह ऐसे लोगों को अपना निशाना बनाते थे जो कम पढ़े लिखे होते थे। इनके प्रमाण पत्रों को कॉपी ले लेते थे। साथ ही उन्हें नई सिम सुविधा से दिलाने की बात कहते थे। उक्त सिम अपने पास रखकर व्यक्ति को फर्जी सिम देकर टरका देते थे। इसके बाद उक्त बैंक की पासबुक, एटीएम आदि फ्रॉड करने वालों को बेच देते थे। एसओ ने बताया कि ऐसे कुछ लोग गुजरात और दिल्ली के जानकारी में आए हैं।
पढ़े लिखे हैं सभी आरोपी
तीनों आरोपी पढ़े लिखे हैं। आशीष बीकॉम किए हुए है तो स्वतंत्र सिंह पॉलीटेक्निक कर चुका है। साथ ही शशिकपूर भी बीएसएसी किए हुए है। पुलिस के अनुसार, तीनों का तकनीकी ज्ञान बहुत मजबूूत है। पूछताछ में आरोपियों के एक और साथी का नाम प्रकाश में आया है। उसकी भी तलाश की जा रही है।