उत्तर प्रदेश में इटावा जिले के इकदिल पिलखर के रामप्रकाश उर्फ टिल्लू को भले ही फांसी की सजा सुना दी गई, लेकिन उसने वह जमीन हासिल कर ली जिसके लिए भाई और उसके पूरे परिवार को मौत के घाट उतारा था। जेल में रहने के दौरान वरासत जमीन अपने नाम दर्ज कराई फिर पत्नी के नाम सेल टू एग्रीमेंट कर हाईवे किनारे की पूरी जमीन बेच डाली।
पिलखर गांव के रामसनेही यादव के दो बेटे सुरेश चंद्र यादव और रामप्रताप उर्फ टिल्लू के अलावा पांच बेटियां सुनीता, अनीता, ताराना, हरप्यारी और रामधकेली हैं। सभी बेटियों और बेटों की रामसनेही ने शादी कर दी थी। उनके नाम नाम इटावा-कानपुर हाईवे पर किनारे 36 बीघा जमीन थी। पिता की मौत के बाद सुरेश और रामप्रताप उर्फ टिल्लू के नाम वरासतन 18-18 बीघा जमीन दर्ज हो गई।
हाईवे किनारे होने के कारण जमीन की कीमत करोड़ों में थी। ग्रामीणों के अनुसार रामप्रताप नशे और जुआ खेलने का लती था। इसी लत में उसने अपने हिस्से की 18 बीघा जमीन बेच दी थी। उसने नजर बड़े भाई सुरेश की जमीन पर थी। सुरेश अपने हिस्से की जमीन पर खेतीबाड़ी करते थे। जमीन हासिल करने के लिए ही रामप्रताप ने 27 मई 2012 में भाई, भाभी, तीन भतीजी और इकलौते भतीजे की हत्या कर दी।