कानपुर देहात। नया शैक्षिक सत्र शुरू होने में करीब डेढ़ माह का समय बचा है। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो जाएगा। बहुत से अभिभावक अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में दाखिला दिलाने की तैयारी में हैं। वहीं, कुछ अभिभावक अपने बच्चों का यूकेजी से कक्षा एक में प्रवेश कराने की तैयारी में है। ऐसे में अनिवार्य की गई अपार आईडी बड़ी समस्या बनी हुई है। आधार व पूर्व के स्कूलों में दर्ज जन्म तिथि, नाम में अंतर होने से अपार आईडी नहीं बन पा रही है। इससे अभिभावक व शिक्षक परेशान हैं।
केंद्र सरकार ने ''''वन स्टूडेंट वन आईडी'''' के रूप में कक्षा 1 से कक्षा 12 तक सभी बोर्ड के संचालित स्कूल के छात्र-छात्राओं की ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार आईडी) बनाने के निर्देश दिए हैं। यह आईडी यू-डायस पोर्टल के माध्यम से बनाई जानी है। शिक्षा विभाग द्वारा सभी माध्यमिक, परिषदीय, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त विद्यालयों के पंजीकृत छात्र-छात्राओं की यूनिक अपार आईडी बनाई जा रही है। मगर अपार आईडी को जेनरेट करने के लिए बच्चों के आधार में प्रदर्शित हो रहे नाम, जन्मतिथि का विद्यालय के रजिस्टर दर्ज जन्म तिथि में अंतर होना और यू डायस पोर्टल पर पूर्व से दर्ज प्रविष्टियों में एकरूपता में भिन्नता परेशानी बनी है। इससे अपार आईडी नहीं बन पा रही है।
विभागीय आंकड़ों की बात करें तो जिले के सभी बोर्ड के पंजीकृत 2, 76, 175 बच्चों में 1, 54, 041 की अपार आईडी बन सकी है। अभी भी आधे से अधिक बच्चों का आईडी नहीं बन सकी है। इसमें काफी संख्या में बच्चों के नाम व जन्म तिथि में भिन्नता परेशानी बनी हुई है। अपार आईडी बनाने के लिए पहले 31 जनवरी की तिथि निर्धारित थी। इसे बढ़ाकर पांच फरवरी किया गया। पांच फरवरी भी बीत चुकी है, मगर स्थिति साफ नहीं हुई है। हालांकि शिक्षक ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर आधार संशोधन व अपार आईडी बनाने में जुटे हैं।
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आधार की खामियां अपार में बनी रोड़ा
आधार की कमियां भी अपार आईडी में रोड़ा बनी है। अपार आईडी सत्यापन के लिए आधार बनवाने या संशोधन कराने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। ऐसे में जरूरत के मुताबिक काउंटर न होने से लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। इसमें बार-बार आवेदन निरस्त होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजपुर ब्लॉक में आधार संशोधन कर रहे शिक्षक अजीत कुमार ने बताया कि नये आधार के आवेदन में ऊपर से ही दिक्कत है। आवेदन किया जा रहा है, लेकिन वह रद्द हो जा रहा है। हालांकि, आधार संशोधन में कोई दिक्कत नहीं है। अपार आईडी बनवाने के लिए त्रुटियों को दुरुस्त कराने के लिए बीआरसी पर भी बच्चों की भीड़ लग रही है।
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बताई परेशानी....
अमराहट के संजय कुमार ने बताया कि बेटी दीपांजलि गांव के परिषदीय स्कूल में कक्षा पांच की छात्रा है। उसके आधार कार्ड में दीपांजलि कुमारी लिखा है, जबकि स्कूल में दीपांजलि दर्ज है। पिछले एक सप्ताह से वह आधार कार्ड संशोधन के लिए परेशान है। औरैया व सिकंदरा भी गए। अब बीआरसी में नाम संशोधन हुआ है, मगर अपार आईडी अभी तक नहीं बनी है।
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राजपुर ब्लाॅक के रमऊ निवासी सुशीला देवी ने बताया कि बेटी नाव्या की अपार आईडी बनवाने के लिए एक माह से परेशान हैं। बेटी का नाम स्कूल में नब्या लिखा है, जबकि आधार में नाव्या लिखा है। इससे उसे कई बार चक्कर लगाने पड़े। मंगलवार को ब्लॉक आकर आधार में संशोधन कराया है। अब अपार आईडी बनने की बात कही गई है।
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अपार आईडी बनने में आ रही प्रमुख समस्याएं-
1. परिषदीय विद्यालय में पढ़ रहे छात्रों का आधार न होना।
2. छात्रों के बने हुए आधार में प्रदर्शित नाम और जन्मतिथि का विद्यालय के एसआर रजिस्टर में दर्ज नाम और जन्मतिथि से अलग होना।
3. यू-डायस पोर्टल पर नवीन नामांकित छात्रों की प्रविष्टियां प्रदर्शित होना।
4. वर्तमान में नवीन आधार बनाने के लिए अनिवार्य किए गए ऑनलाइन जन्म प्रमाण पत्र की उपलब्धता न होना।
5. शिक्षण सत्र के आरंभ में कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों का नामांकन परिषदीय विद्यालयों के बाद मान्यता प्राप्त व प्राइवेट विद्यालयों में करा लिया।
6. कुछ छात्र जो पूर्व में किसी अन्य विद्यालय में अध्ययन कर रहे थे उनके पेन नंबर का वर्तमान विद्यालय में इंपोर्ट न हो पाना।
7. बायोमेट्रिक सत्यापन न होने की दशा में बच्चों का आधार इन एक्टिव हो जाना।
........................वर्जन......
अपार आईडी सभी बच्चों की बननी है। कई बच्चों के नाम, जन्मतिथि में खामियां हैं। इसको लेकर निर्देश दिए गए हैं कि पहले जितने बच्चों के अभिलेख ठीक है, उनकी अपार आईडी बना ली जाए। जिनमें खामियां है उन बच्चों का शासन ने विवरण गूगल सीट पर मांगा है। शासन से निर्देश मिलने पर उनकी भी आईडी बनवाई जाएगी। फिलहाल सभी ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर अपार आईडी बनाई जा रही है।
- अजय कुमार मिश्र, बीएसए