यूपी के कानपुर में न्यूरो अपडेट कॉंफ्रेंस में बताया गया कि मिर्गी रोगी को दौरा पड़ने पर जूता-चप्पल सुंघाने और तंत्र-मंत्र करने के बजाय उसके नाक पर दवा स्प्रे कर दें। इससे दौरा तुरंत रुक जाएगा। एसजीपीजीआई चंडीगढ़ के बाल न्यूरो रोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेश सैनी ने बताया कि स्प्रे से मस्तिष्क की उत्तेजना कम हो जाती है और दौरा रुक जाता है।
उन्होंने बताया कि गंदगी के कारण होने वाली न्यूरो सिस्टीसरकोसिस बीमारी बच्चों में मिर्गी का दौरा पड़ने का मुख्य कारण है। भारतीय बालरोग अकादमी और जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बालरोग अस्पताल के बैनर तले न्यूरो अपडेट कॉंफ्रेंस का आयोजन मेडिसिन विभाग में किया गया। इस मौके पर बताया गया कि डायरिया के कारण भी बच्चों को दौरे पड़ते हैं।
डायरिया के सौ बाल रोगियों में एक को यह दिक्कत होती है। यह दिक्कत ठीक हो जाती है। अगर मस्तिष्क में आक्सीजन की अधिक कमी हो गई तो दौरे आगे जारी रह सकते हैं। बच्चों की समस्या को पहले पकड़ कर इलाज किया जाए तो समस्या ठीक हो जाती है। इस मौके पर डॉ. विश्वरूप चक्रवर्ती ने बताया कि बच्चों के मूवमेंट में दिक्कत हो तो तुरंत जांच कराएं।
बच्चे को पार्किंसंस की भी दिक्कत हो सकती है। वैसे मूवमेंट डिस्आर्डर का कारण जेनेटिक होता है लेकिन संक्रमण से भी यह दिक्कत हो सकती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईआईटी के निदेशक डॉ. अभय करंदीकर रहे। उन्होंने मेडिकल में 5जी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के संबंध में बताया। कार्यक्रम में बाहर से आए डॉ. रश्मि कुमार, डॉ. राहुल जैन, डॉ. प्रशांत जौहरी, डॉ. विशाल सौंधी, डॉ. जेएन गोस्वामी ने विचार रखे। यहां पर डॉ. एके आर्या, डॉ. यशवंत राव, डॉ, ओपी पाठक, डॉ. आरएन चौरसिया आदि मौजूद थे।
दिमागी बुखार से पड़ रहा ब्रेन अटैक
ब्रेन अटैक बड़ी उम्र के लोगों की ही समस्या नहीं है, बच्चों में भी ब्रेन अटैक पड़ रहा है। एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत जौहरी ने बताया कि दिमागी बुखार, बैक्टीरियल संक्रमण, दिल में छेद की बीमारी आदि दिक्कतों से भी बच्चों को ब्रेन अटैक पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि हाल में पैदा हुए बच्चे को भी ब्रेन अटैक होता है। समय से इलाज देकर रोगी को ठीक किया जा सकता है।