ग्रामीणों का पीपल के नीचे की हवा पर ऐसा विश्वास है कि कहते हैं कि गांव में पहले तो जल्दी कोई बीमार ही नहीं होता। अगर हुआ भी तो मामूली इलाज से ठीक हो जाता है।
यूपी के औरैया जिले में बेला की ग्राम पंचायत मल्हौसी के लोग अपनी जीवन शैली को प्रकृति की छांव में संवार रहे हैं। चार हजार की आबादी वाले इस गांव में 245 पीपल के पेड़ हैं। लोगों की सुबह इन्हीं पेड़ों के नीचे व्यायाम से साथ शुरू होती है तो शाम भी पीपल की छांव में विश्राम के साथ ढलती है।
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विश्वास और मान्यता भी ऐसी कि घर में खुशहाली आने के साथ लोग एक नया पीपल का पेड़ भी लगाते हैं। 400 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बसे इस गांव में 677 घर हैं। ग्रामीणों का पीपल के नीचे की हवा पर ऐसा विश्वास है कि कहते हैं कि गांव में पहले तो जल्दी कोई बीमार ही नहीं होता।
अगर हुआ भी तो मामूली इलाज से ठीक हो जाता है। गांव के शिवा राठौर, राजन गुप्ता, शिवम, गोपाल सोनी सभी कहते हैं कि बुजुर्गों ने यह पेड़ वरदान के रूप में उन्हें दिए हैं। कोरोना काल में भी इन्हीं पेड़ों ने हमें संजीवनी दी है।
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आज भी लगाएंगे पौधे
ग्राम प्रधान उर्मिला देवी ने बताया कि गांव में पीपल का पेड़ लगाने की बुजुर्गों की परंपरा को बरकरार रखा जाएगा। बुजुर्गों ने नई पीढ़ी के लिए वरदान के रूप में पेड़ दिए हैं। अब हम भी आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण देने के लिए अधिक से अधिक पीपल के पेड़ लगाएंगे।