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Kanpur: यूपीसीडा और नगर निगम के बीच फंसे उद्यमी, 25 करोड़ देते हैं गृहकर; सड़कों पर गड्ढे...पोल पर लाइट तक नहीं

Sun, 12 Jan 2025 11:26 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: यूपीसीडा ने नगर निगम से पनकी और रूमा औद्योगिक क्षेत्र पूरी तरह से वापस लेने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। रूमा क्षेत्र में विकाय का खाका भी तैयार किया है। वहीं, पनकी औद्योगिक क्षेत्र का सर्वे कराया जा रहा है, जो इसी माह पूरा करने की योजना है।
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औद्योगिक क्षेत्र बदहाल - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर नगर निगम की लापरवाही से पनकी, रूमा, दादानगर औद्योगिक क्षेत्र बदहाल हैं। टूटी सड़कों पर अंधाकुप से राह चलना मुश्किल है। उद्यमियों को वारदात का भी खतरा रहता है। बजबजाती नालियां और दुर्दशाग्रस्त पार्क क्षेत्र की बदहाली को बयां करते नजर आते हैं। नगर निगम इन क्षेत्रों से हर साल करीब 25 करोड़ रुपये गृहकर वसूलता है। 21 साल से अपेक्षित विकास न होने पर यूपीसीडा ने नगर निगम से पनकी और रूमा औद्योगिक क्षेत्र वापस लेने की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

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इसके लिए पनकी क्षेत्र का सर्वे कराया जा रहा है। 500 एकड़ में बसे पनकी औद्योगिक क्षेत्र में करीब 1500 फैक्टरियां संचालित हैं। यूपीसीडा ने वर्ष 2003 में क्षेत्र को नगर निगम को हस्तांतरित किया था। शासन का आदेश है कि औद्योगिक क्षेत्रों से जो टैक्स वसूला जाए, उसकी 60 फीसदी धनराशि इन्हीं क्षेत्रों में विकास कार्यों पर खर्च हो, लेकिन नगर निगम ने पिछले साल फरवरी में पनकी, रूमा के औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 15 करोड़ से विकास कार्यों के टेंडर कराए थे।

सड़कों की वजह से आवागमन में दिक्कतें
इनमें से ज्यादातर कार्य हो चुके हैं, फजलगंज औद्योगिक क्षेत्र में नाला निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुछ कार्य चल भी रहे हैं, पर उसके बाद अन्य कार्य कराना तो दूर, टेंडर तक नहीं कराए। एलएमएल के पास से थम्मअप चौराहा, नौरैयाखेड़ा की तरफ सड़कों में जर्जर सड़कों में जगह-जगह गड्ढे हैं। कमोवेश यही स्थिति रूमा औद्योगिक क्षेत्र की है। वहां भी टूटी सड़कों की वजह से आवागमन में दिक्कतें होती हैं। आए दिन भारी वाहनों की कमानी टूटती हैं, जिसकी वजह से यातायात भी प्रभावित होता है।

औद्योगिक क्षेत्र बदहाल - फोटो : amar ujala
पनकी औद्योगिक क्षेत्र का कराया जा रहा है सर्वे
जगह-जगह गंदगी, कूड़ा फैला है। नालों की सफाई न होने के कारण बरसात में सड़कों से लेकर फैक्टरियों तक में पानी भर जाता है। उद्यमियों ने समस्याओं को लेकर शासन से गुहार लगाई थी। यूपीसीडा ने नगर निगम से पनकी और रूमा औद्योगिक क्षेत्र पूरी तरह से वापस लेने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। रूमा क्षेत्र में विकाय का खाका भी तैयार किया है। वहीं, पनकी औद्योगिक क्षेत्र का सर्वे कराया जा रहा है, जो इसी माह पूरा करने की योजना है।

औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित कार्य
यूपीसीडा औद्योगिक क्षेत्रों का कायाकल्प करेगा। प्राधिकरण यहां सड़कों, नालियों, फुटपाथ के निर्माण के साथ ही मार्ग प्रकाश, सुरक्षा के मद्देनजर दृष्टिकोण से सीसीटीवी कैमरे, विद्युत सब स्टेशन, टेलीफोन एक्सचेंज आदि सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारियां कर रहा है। सड़कों का निर्माण एफडीआर (फुल डेप्थ रीक्लेमेशन) तकनीक से बनवाने की भी योजना है।

औद्योगिक क्षेत्र बदहाल - फोटो : amar ujala
रूमा औद्योगिक क्षेत्र में 86 करोड़ से कार्य शुरू
यूपीसीडा ने औद्योगिक केंद्र रूमा को अटल औद्योगिक अवसंरचना मिशन के तहत 86 करोड़ से आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने का खाका खींचा है। यह क्षेत्र वर्ष 2004-05 में विकसित हुआ था। सबसे पहले पाइप लाइन बिछवाकर सड़कें, पुलिया, नाली, स्ट्रीट लाइट आदि कार्य कराए जाएंगे।
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पनकी और रूमा औद्योगिक क्षेत्र को नगर निगम से पूरी तरह वापस लेने की तैयारी है। पहले रूमा में विकास कार्य होंगे। पनकी औद्योगिक क्षेत्र का सर्वे कराया जा रहा है। खर्च का प्रस्ताव बनाकर बोर्ड को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने पर कार्य शुरू कराए जाएंगा।  -मंसूर कटियार, क्षेत्रीय प्रबंधक यूपीसीडा

नगर निगम औद्योगिक क्षेत्र में सड़कों, नाले, नालियों के निर्माण सहित अन्य विकास कार्य कराता रहा है। कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराए जाते हैं। फजलगंज औद्योगिक क्षेत्र में नाला निर्माण सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में कई विकास कार्य हो रहे हैं।  -एसएफए जैदी, मुख्य अभियंता, नगर निगम

सड़कें पूरी तरह खराब पड़ी हैं। लाइटें जलती नहीं हैं। बरसात में सड़कों पर पानी भर जाता, जिससे निकलना मुश्किल हो जाता है। कई सालों से नगर निगम ने कोई काम ही नहीं कराया।  -मनोज बंका, प्रांतीय अध्यक्ष, पीआईए

क्षेत्र में साफ-सफाई नहीं होती है। नगर नगर की गाड़ी कूडा उठाने महीनों तक नहीं आती है। नालियां बजबजा रही हैं। शहर की सड़कों के लिए लाइटें मिल जाती हैं, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों में लाइटें नहीं लगाई जाती हैं।  -दिनेश बरासिया, अध्यक्ष, कानपुर चैप्टर, आईआईए
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