कानपुर। मीटर में स्टोर हुई दो महीने की यूनिट का बिल उच्च श्रेणी की दर लगाकर भेजे जाने के मामले को केस्को प्रबंधन ने गंभीरता से लिया है। केस्को के प्रबंध निदेशक (एमडी) अजय माथुर ने बुधवार को आईटी डिवीजन के एक्सईएन को ऑफिस बुलाकर जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने स्पष्ट किया है कि बिल अलग-अलग श्रेणी से बनवाकर ही जमा कराया जाएगा। जिसे लगता है कि उनका बिल ज्यादा है, वह सोशल डिस्टेंसिंग के साथ अपने क्षेत्र के एक्सईएन से मिलकर बिल की जांच करा सकता है। गलत हुआ तो संशोधन किया जाएगा। टोल फ्री नंबर 18001801912 पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इन दिनों शहर की अधिकांश आबादी इस तरह की समस्या से जूझ रही है। सबस्टेशन में इस समय बिल जमा करने वाले कम, सही कराने वाले ज्यादा नजर आ रहे हैं। अमर उजाला ने उपभोक्ताओं की इस समस्या को बुधवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि बिल निर्धारित श्रेणी से ही लिए जाएंगे।
ऐसे लगाएं अपने बिल का हिसाब
उदाहरण के तौर पर मान लो किसी की दो महीने की यूनिट 350 आई है। एक महीने की 175 यूनिट हुई। शुरुआती 150 यूनिट का बिल साढ़े पांच रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बनेगा। मतलब यह हुआ 825 रुपये। इसके बाद बची 25 यूनिट का बिल छह रुपये प्रति यूनिट से 150 रुपये होगा। मतलब 175 यूनिट का बिल होगा 975 रुपये। दो महीने के हिसाब से यह हो जाएगा 1950 रुपये। हालांकि इसमें सर्विस चार्ज वगैरह इसमें जुड़ेगा।
जमा करने के बाद भी जुड़ा तो दुरुस्त होगा
अगर किसी का बिल अप्रैल में जमा करने के बाद भी मई में जुड़कर आ गया है तो वह भी अपने डिवीजन के एक्सईएन से मिलकर सही करा सकता है। आम तौर पर मीटर रीडर जो बिल दे रहे हैं, उसमें पिछला जमा हुआ औसत बिल घटाकर ही बनाया जा रहा है। केस्को एमडी अजय कुमार माथुर ने कहा कि गर्मी में खपत बढ़ने पर बिजली का बिल बढ़ता है लेकिन अगर किसी को लगता है कि बढ़े स्लैब से पूरा बिल बना है और ज्यादा है तो एक्सईएन से मिल सकते हैं। बिल दुरुस्त होगा, जितना खर्च किया है, उतना ही देना पड़ेगा।