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इलेक्ट्रिकसिटी सप्लाई कंपनी के लोग ही लगा रहे 'सरकार की मंशा' पर ग्रहण

Thu, 16 Nov 2017 03:17 PM IST
रामजी द्विवेदी, अमर उजाला कानपुर
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डेमो पिक
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केंद्र और प्रदेश सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए जगह-जगह सोलर पैनल लगवाने की कवायद कर रही है। लेकिन कानपुर इलेक्ट्रिकसिटी सप्लाई कंपनी (केस्को) कर्मियों का रवैया सरकार की मंशा पर ग्रहण लगा रहा है। सोलर पैनल लगवाने वाले उपभोक्ताओं को भी बिजली के बिल में कोई कमी नहीं हो रही है। 
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विकास भवन में इस साल मार्च में 70 किलोवाट का सोलर पैनल लगाया गया था। यहां आठ से दस लाख रुपये प्रतिवर्ष बिजली का बिल आता था। पैनल लगने के बाद नियमानुसार बिल में तीस से चालीस प्रतिशत तक कमी होनी चाहिए लेकिन बिल पहले की तरह ही आ रहा है।

न तो बिजली के बिल में बिजली उत्पादन का विवरण दिया जा रहा है और न ही बिल में कटौती की कोई जानकारी। जून में 80 हजार रुपये का बिल आया है और जुलाई में 91 हजार। जो पहले की तुलना में बराबर है। नेडा अधिकारी नरेंद्र सिंह का कहना है कि बिजली के बिल में कोई परिवर्तन न होने की बात शासन में रखी गई है। अभी तक केस्को ने इस पर कोई सुधार नहीं किया। केस्को सॉफ्टवेयर अपडेट न होने की बात कर रहा है।  
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इन्होंने लगवाया है सोलर पैनल 
- बाल मंदिर महाराष्ट्र मंडल बालिका चैरिटेबल ट्रस्ट हायर सेकेंड्री स्कूल, खलासी लाइन (पांच किलोवाट)
- कन्हैयालाल मेमोरियल चैरिटेबल अस्पताल सचेंडी (पांच किलोवाट)
- केआईटी रूमा, (450 किलोवाट)
- आलोक नागौरी, मोती सदन, स्वरूप नगर (पांच किलोवाट)
- आरती तिवारी, वर्ल्ड बैंक बर्रा, (पांच किलोवाट)

ये हैं नियम-
मीटर के लोड के मुताबिक केस्को में आवेदन
- 250 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क के बाद नेट मीटरिंग का एनओसी मिलता है।
- दोनों मीटर में रीडिंग आएगी, बिजली खर्च होने और उत्पादन होने का विवरण
- उत्पादन होने वाली बिजली की रीडिंग काटकर उपभोक्ता को बिल मिलना चाहिए

ये है सोलर पैनल का मूल्य
1 से 5 किलोवाट-  74 हजार रुपये
5 से 50 किलोवाट- 67950 रुपये
50 से 100 किलोवाट- 58500 रुपये
100 से 250 किलोवाट- 57600 रुपये
250 से 500 किलोवाट- 56700 रुपये

तीस प्रतिशत मिलता है अनुदान
आवासीय जनता, शिक्षण संस्थान, अनाथालय, स्वयंसेवी संस्थाओं को तीस प्रतिशत अनुदान देने का नियम है। निजी संस्थाओं को अनुदान दिए जाने का नियम नहीं है।

ऐसे करता है काम
केस्को से एनओसी मिलने के बाद सामान्य मीटर के साथ नेट मीटर लगाया जाता है। पैनल से बनने वाली बिजली का विवरण नेट मीटर में दिया जाता है। अधिक बिजली बनने पर ग्रिड को दी जाती है। सामान्य रीडिंग को नेट मीटर की रीडिंग से कम करने के बाद बिल बनाया जाता है।

चार यूनिट तक बनती है बिजली
विभागीय लोगों के मुताबिक तेज धूप होने पर एक किलोवाट सोलर पैनल में लगभग चार यूनिट बिजली बनती है। छोटे से बड़े पैनल तक बिजली का उत्पादन इसी क्रम में होता है।

32 लाख रुपये की बिजली बना चुका विकास भवन
विभागीय सूत्रों के मुताबिक विकास भवन में रोजाना लगभग दो सौ यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। अभी तक 54256 यूनिट बिजली बनाई जा चुकी है। बिजली की जो दर है उसके मुताबिक अभी तक लगभग 32 लाख रुपये की बिजली बनाई जा चुकी है। नेडा केे पोर्टल पर रोजाना बनने वाली बिजली का विवरण आता है।

सोलर पैनल का अधिक से अधिक प्रचार हो इसका केस्को भी प्रयास कर रहा है। अभी तक ऐसे किसी उपभोक्ता की शिकायत नहीं मिली है। अगर किसी उपभोक्ता के नेट मीटर और सामान्य बिजली मीटर की रीडिंग में गड़बड़ी है। उसकी शिकायत करें। जांच कराकर तत्काल निदान कराया जाएगा। 
- आशुतोष निरंजन, केस्को एमडी


सोलर पैनल से बन रही बिजली का मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। सोलर पैनल से बनने वाली बिजली का लाभ मिलना चाहिए। उपभोक्ताओं को लाभ दिलाने की मंशा से ही योजना का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इस संदर्भ में केस्को से बात करेंगे। 
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- अरुण कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
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