महापुरुषों की जयंती पर होने वाली 15 छुट्टियों को प्रदेश सरकार ने रदद् कर दिया है। इनमें से एक पैगंबर-ए-इस्लाम की जयंती (12 रबीउल अव्वल) ईद मिलादुन्नबी की छुट्टी रद होने पर मुसलमानों ने आपत्ति जताते हुए आक्रोश जाहिर किया है। उनका कहना है कि इस दिन कानपुर शहर से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकलता है। छुट्टियों को रद करने के फैसले के पीछे योगी सरकार की साजिश बताया और कहा कि सरकार ने हजरत अली की जयंती पर छुट्टी को बहाल क्यों रखा है।
शिया शहरकाजी मौलाना अली अब्बास खां नजफी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पैगंबर-ए-इस्लाम की जयंती के दिन छुट्टी रद करके आस्था को चोट पहुंचाई है। अगर हजरत अली की जयंती पर छुट्टी बहाल है तो नबी पाक की यौम-ए-पैदाइश पर छुट्टी को रद नहीं करना चाहिए था। वहीं शिया शहरकाजी डॉ. हिना जहीर नकवी ने कहा कि सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा की जाएगी। सरकार ने महापुरुषों के नाम पर छुट्टियां रद की हैं लेकिन हुजूर पाक इस्लाम के पैगंबरों के सरदार हैं। ईद मिलादुन्नबी का त्योहार रामनवमी, शिवरात्रि, क्रिसमस जैसा है। इसलिए इस दिन की छुट्टी को फौरन पहले की तरह बहाल किया जाए।
बरेलवी शहरकाजी मौलाना आलम रजा नूरी ने कहा कि जाहिर तौर पर यह फैसला मुसलमानों को बांटने वाला है। पैगंबर-ए-इस्लाम दुनिया में हर फिरके के मुसलमानों के पैगंबर हैं। हजरत अली उनके दामाद और इस्लाम के चौथे खलीफा हैं। ऐसे में पैगंबर-ए-इस्लाम की जयंती पर छुट्टी रद करना और हजरत अली की जयंती पर छुट्टी बहाल रखने का सरकार ने यह घिनौनी राजनीति का संदेश दिया है। ईद मिलादुन्नबी की छुट्टी फौरन बहाल की जाए। बज्मे कासिमी बरकाती के सदस्य मास्टर शाहिद बरकाती ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी की छुट्टी केंद्र सरकार से पूरे भारत में स्वीकृत है। ऐसे में प्रदेश सरकार का इस छुट्टी के साथ छेड़छाड़ करना साजिश है।