डीएवी पीजी कॉलेज के जंतु विज्ञान विभाग में सोमवार को डीएनए फिंगर प्रिंटिंग पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन आईजी आशुतोष पांडेय ने किया। साथ ही कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में शामिल मास्टर माइंड को इसी तकनीकी की मदद से पकड़ा गया था। अब इसका इस्तेमाल बढ़ाने की जरूरत है। इसकी मदद से अपराधियों को आसानी से पकड़ा जा सकता है।
डीएवी और साइटोजीन संस्था की डीएनए फिंगर प्रिंट की कार्यशाला का समापन मंगलवार को होगा। इससे पहले सोमवार को प्रशिक्षण दिया गया। आईजी ने दो दरोगा को भी प्रशिक्षण में लगाया है। संस्था के प्रशासनिक निदेशक सुरजीत सिंह ने बताया कि फोरेंसिक साइंस में डीएन फिंगर प्रिंट सबसे कारगर है।
एचओडी डॉ. प्रभात वाजपेयी ने कहा कि खून की जांच में गोलमाल संभव है लेकिन डीएनए फिंगर प्रिंट की जांच में किसी तरह की मिलावट नहीं की जा सकती है। शरीर के किसी भी हिस्से से मनुष्य या फिर अपराधी की पहचान की जा सकती है। प्रिंसिपल डॉ. रेखा शर्मा ने कहा कि कुछ आपराधिक मामलों में निर्दोषों को फंसाया जाता है। इस तकनीक से आरोपी को अपराधी की श्रेणी में जाने से बचाया जा सकता है।