फतेहपुर सपा शासन काल के मौरंग खनन की जांच में जुटी सीबीआई की एफआईआर के बाद पिछले दो माह से ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की सक्रियता बढ़ी है। वह डायरी के सहारे अवैैध खनन में पर्दे के पीछे रहने वाले हिस्सेदारों को खोज रही है।
इसे लेकर जिले के कई चर्चित चेहरों पर इन दिनों हवाइयां उड़ रही हैं। जल्द ही बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। बता दें कि हाईकोर्ट की रोक के बाद सपा शासन काल में कई साल साल धूल खाने वाली मौरंग पट्टा फाइलों का नवीनीकरण किया गया था। यमुना खदानों के पट्टे असोथर के जिला पंचायत सदस्य सुखराज निषाद और हरिहरगंज के शिव सिंह फर्म को दिए गए थे।
अवैध मौरंग खनन
सीबीआई की जांच में मामले पकड़ में आए। जिले में 2014 से 2017 के दौरान हुए पट्टों की जांच सुखराज और शिव सिंह के पट्टों का आवंटन गलत पाया गया। मामले में तत्कालीन डीएम अभय सिंह और पट्टाधारकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामला मनी लॉड्रिंग से जुड़ा होने के कारण प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू की।
ईडी ने दो माह पहले पट्टाधारकों को लखनऊ बुलाकर पूछताछ की थी। उनके तमाम दस्तावेज जब्त किए थे। सूत्रों के अनुसार दोनों पट्टाधारकों के पास मौरंग खनन के समय हिसाब किताब की डायरी पर अब टीम की नजर टिक गई है। डायरी में जिले के कई चर्चित लोगों से लेनदेन का हिसाब है।
अवैध मौरंग खनन
उनकी पाटर्नरशिप और कुछ अधिकारियों का भी ब्योरो होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। ईडी ने डायरी का खुलासा किया तो मौरंग खनन में पर्दे के पीछे रहकर अकूत संपत्ति कमाने वालों के नाम सामने आ सकते हैं। ईडी ने खनन विभाग से खनन पट्टे का कार्यकाल, जारी रायल्टी, किस दर से रायल्टी जमा हुई, कितना खनन हुआ, किस दाम में बेची गई है। सूत्रों के मुुताबिक ईडी डायरी से प्रकाश में आए लोगों को जल्द ही पूछताछ के लिए बुला सकती है।
सीबीआई को भेजी गई पांच हजार पेज की फाइल
खनन घोटाले में सीबीआई को जिले से खनन संबंधी पत्रावलियों को दिवाली के आसपास जुटाने आना था। फिलहाल सीबीआई का आना नहीं हो सका है। सीबीआई ने खनन से जुड़े कार्यालय से सारे दस्तावेज तलब किए। करीब पांच हजार पेज की फाइलों को जिले से कुछ दिन पहले भेजा गया है। उनमें अवैध खनन का परमीशन से लेकर कार्रवाई, जांच, बयान आदि का ब्योरा है। सीबीआई भी जल्द ही मामले में चार्जशीट दाखिल कर सकती है।