हफ्ते भर बाद देश में जहां लोग हर्षो-उल्लास से दीवाली मनाएंगे, वहीं मनरेगा के 50 हजार मजदूरों के घर एक चिराग तक जल पाएगा, यह कहना बेहद मुश्किल है। दरअसल इन मजदूरों को केंद्र से मजदूरी का पैसा नहीं मिला पाया है। तकरीबन पांच करोड़ का भुगतान लटका है। काम करने के बाद भी पैसा न मिलने से मजदूर परेशान हैं। ब्लाक कार्यालय से चक्कर लगाकर थक चुके हैं। खातों में पैसा पहुंचने की बात कहकर इन्हें उल्टे पांव लौटा दिया जाता है।
लखनऊ की एसबीआई शाखा में जनपद का मनरेगा खाता संचालित है। करीब तीन माह पहले खाते में पैसा खत्म हो गया था। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने जानकारी मुख्यालय को दी। मुख्यालय से पत्र केंद्र सरकार को भेजा गया। इसके बाद भी लंबा समय बीत गया है लेकिन अभी तक खाते में पैसा नहीं आ सका है। खाते में पैसा न होने से जनपद में लगभग 50 हजार मनरेगा मजदूरों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। ऐसे में करीब पांच करोड़ रुपये का भुगतान फंस गया है। पैसे का भुगतान न होने से मनरेगा जाबकार्डधारकों के घरों के चूल्हे ठंडे होने की नौबत आ गई है।
परेशान मजदूर ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी के चक्कर लगा रहे हैं। मजदूरी के लिए मजदूर सुबह-सुबह की प्रधान के घर पर पहुंचकर दस्तक दे रहे हैं। सबसे ज्यादा भुगतान नवाबगंज ब्लाक का फंसा है। सुमेरपुर, मियागंज, फतेहपुर चौरासी, गंजमुरादाबाद में भी लाखों रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। जानकारों की मानें तो मजदूरों को काम करने के 7 दिन के अंदर पैसा मिल जाना चाहिए लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जॉबकार्डधारक मजदूरी के लिए भटक रहे हैं। दीवाली में एक सप्ताह का समय शेष है ऐसे में यह जॉबकार्डधारक त्योहार खराब होने की आशंका से परेशान नजर आ रहे हैं।
ग्राम रोजगार सेवक भी खाली हाथ