कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पोषण सुरक्षा के लिए श्रीअन्न के महत्व पर सोमवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें उप्र कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. परमेंद्र सिंह ने बताया कि मोटे अनाज के सेवन से मधुमेह, मोटापा की समस्या से निपटा जा सकता है। यह ग्लूटेन युक्त होते हैं और इनमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। मोटे अनाज एंटी ऑक्सीडेंट का स्रोत है।
उन्होंने बताया कि श्रीअन्न में आयरन की उच्च मात्रा महिलाओं की प्रजनन आयु और शिशुओं में एनीमिया को रोकने में सक्षम है। विवि के लाल बहादुर शास्त्री सभागार में श्रीअन्न (मिलेट्स): वैज्ञानिक खेती से मूल्य वर्धन तक विषय पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम के अध्यक्ष निदेशक शोध डॉ. आरके यादव ने बताया कि मोटे अनाज गेहूं और चावल की तुलना में सस्ते होने के साथ उच्च प्रोटीन, फाइबर, विटामिन तथा आयरन से भरपूर होेते हैं। इनमें कैल्शियम और मैग्नीशियम की प्रचुरता होती है।
मुख्य अतिथि रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के निदेशक शोध डॉ. एसके चतुर्वेदी ने कुपोषण को कम करने तथा पोषक तत्वों की पूर्ति करने के लिए श्रीअन्न, स्थानीय उत्पादों के पौष्टिक गुणों के साथ उनकी प्रसंस्करण विधियों के बारे में बताया।
इस मौके पर चंद्रशेखर महिला कृषक समिति की अध्यक्ष डॉ. विजय रत्ना तोमर, कुल सचिव डॉ. नौशाद खान, निदेशक बीज डॉ. विजय कुमार यादव, कृषक समिति के अध्यक्ष बाबू सिंह सहित ने भी जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. महक सिंह, डॉ. एमजेड सिद्दीकी, डॉ. लोकेंद्र सिंह, डॉ. वीके कनौजिया, डॉ. विनोद प्रकाश, डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह, मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान मौजूद रहे। संचालन डॉ. अरविंद कुमार ने किया।