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फिर कलेजे कांपे, फिर लोग भागे

Mon, 27 Apr 2015 02:20 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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भूकंप ने रविवार को फिर शहरवासियों को डराया। दहशतजदा शहरवासी घर, दुकान और दफ्तर छोड़कर सड़कों पर निकल आए और पार्क, मैदान में जाकर बैठे। दहशतजदा तमाम शहरी अपने घरों में जाने को तैयार नहीं दिखे। भू-विज्ञानियों का कहना है कि खतरा अभी टला नहीं है।
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भूकंप के झटके लगते रहेंगे। शनिवार, रविवार का आंकड़ा मिला लिया जाए तो अब तक 47 से ज्यादा बार पृथ्वी डोल चुकी है। रविवार  को ही छह झटके लगे हैं। सबसे बड़ा और पहला झटका 6.7 मैग्नीट्यूड स्केल रहा है, जिसका केंद्र नेपाल से आगे रहा है। इसका असर जमीन के अंदर 10 किलोमीटर तक रहा। 

कानपुर में रिक्टर स्केल की तीव्रता 4.5  रही है।  देर रात करीब 11ः30 भूकंप का एक और झटका लगा। शनिवार को आए तेज भूकंप और उससे पैदा हुई दहशत से निजात नहीं मिली। रविवार को दोपहर 12:43 बजे फिर धरती डोल गई। तेज कंपन होने से पंखे हिलने लगे।
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फ्रिज और आलमारी हिलने-डुलने लगी। यह देख शहरवासी कांप गए। फिर भूकंप आया कहकर घरों से बाहर भागे और घंटों सड़क पर टहलते रहे। तमाम लोग पार्क में चले गए। जेके टेंपल से थोड़ी दूर सृष्टि अपार्टमेंट पूरी तरह से खाली हो गया।

भूकंप से दहशतजदा अपार्टमेंट के लोग बाहर निकल आए और गेट के बाहर घंटों बैठे रहे। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी, यूपीटीटीआई और एचबीटीआई सहित तमाम शैक्षिक संस्थानों के हॉस्टल खाली हो गए। 

यही  नजारा नवाबगंज, कंपनी बाग, माल रोड, बिरहाना रोड, कैंट, सिविल लाइंस, आर्य नगर, स्वरूप नगर, अर्मापुर, पनकी, गोविंद नगर, बर्रा, किदवई नगर, नौबस्ता, विकास नगर, काकादेव और कल्याणपुर में देखने को मिला।

रविवार को 6.7 मैग्नीट्यूड स्केल का भूकंप आया। इसका केंद्र कानपुर से 500 किलोमीटर से ज्यादा दूर था, फिर भी तेज झटके महसूस किए गए हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। भूकंप के झटके लगातार आ रहे हैं।

रविवार को ही पहले 6.7  मैग्नीट्यूड स्केल का झटका लगा, फिर 5, 4.7, 4.6 और 4.5 मैग्नीट्यूड स्केल के चार और झटके महसूस किए गए। कानपुर से नेपाल की दूरी ज्यादा है। इसलिए पांच या उससे ज्यादा मैग्नीट्यूड स्केल के भूकंप के झटके कानपुर में नहीं महसूस किए जा रहे हैं।
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छह से ऊपर का जो भी झटका आएगा, उसे महसूस किया जा सकेगा। शनिवार को पहले 7.9, फिर 6.6  मैग्नीट्यूड स्केल का भूकंप आया था।     

-   प्रो. जावेद एन मलिक, भू-विज्ञानी आईआईटी कानपुर

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