कानपुर में पुलिस कमिश्नरी भले ही लागू हो गई हो लेकिन कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं हुआ है। चोरी की एफआईआर दर्ज कराने के लिए पीड़ित दस दिनों से भटक रहा है। घटना की जानकारी डीसीपी पश्चिम से लेकर थानेदार तक को है लेकिन जांच का हवाला देकर मामला टाला जा रहा है। घटना हैलट से जुड़ी है, शायद इसलिए पुलिस टालमटोल कर रही है।
पनकी रतनपुर निवासी अजय विश्वकर्मा ने सात मई को मां कमलावती (62) को हैलट में भर्ती कराया था। वो कोरोना संक्रमित थीं। हालत बिगड़ने पर उनको आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। 24 मई को कमलावती की मौत हो गई थी। इसके पहले 23 मई को कमलावती ने अजय को फोन कर बताया था कि अस्पताल में खाना देने वाली युवती ने उनके टप्स और मोबाइल चोरी कर लिया है।
उसको तुम ले लेना। इसकी बाकायदा कॉल रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। अजय ने बताया कि उन्होंने इसकी शिकायत और तहरीर डीसीपी पश्चिम डॉ. संजीव त्यागी को दी थी। तहरीर थानेदार से लेकर चौकी इंचार्ज को फारवर्ड कर दी गई लेकिन जांच का हवाला देने के सिवाय पुलिस ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की।
सरकारी मामला, ऐसे नहीं दर्ज हो पाएगा
अजय ने बताया कि हैलट चौकी इंचार्ज मुन्ना सिंह से इस बारे में संपर्क किया। इस पर मुन्ना सिंह ने उनसे कहा कि मामला सरकारी अस्पताल से जुड़ा हुआ है। ऐसे केस दर्ज नहीं हो पाएगा। जांच हो रही है। विभागीय रिपोर्ट मिलने के बाद केस दर्ज हो पाएगा। पुलिस का ये रवैया सवालों के घेरे में है। एक तो पीड़ित के मरीज की मौत हो गई दूसरी तरफ अस्पताल के भीतर शर्मसार करने वाली घटना हुई और पुलिस उस पर कार्रवाई नहीं कर रही है।
मामले की जानकारी हुई है। कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जांच में जो दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
असीम अरुण, पुलिस कमिश्नर