कानपुर। कोडीनयुक्त कफ सिरप व नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए ड्रग विभाग अभियान चलाकर सभी थोक दवा फर्मों व गोदामों का सत्यापन करेगा। फर्म संचालकों की कुंडली खंगाली जाएगी। ये निर्देश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त ने ड्रग विभाग को दिए हैं।
अक्तूबर से दिसंबर तक नशीली दवाओं को लेकर की गई जांच व कार्रवाई में पता चला था कि कई ऐसी फर्मे पंजीकृत हैं जो पंजीकृत पते पर अस्तित्वहीन हैं। ये फर्में लाइसेंस लेने के बाद कभी संचालित ही नहीं हुई। इन जगहों पर जब विभाग ने छापा मारा तो पंजीकृत पते पर केवल भवन स्वामी ही मिले जिन्हें फर्म संबंधी कोई जानकारी भी नहीं थी। महाराजपुर स्थित मां दुर्गा मेडिकोज बंद मिला था और संचालक नशीली दवाओं का कारोबार भी कर रहा था। मकान मालिक ने बताया था कि संचालक रोहन पचौरी ने भवन किराये पर लिया था लेकिन मेडिकल स्टोर संचालित ही नहीं किया। जब हमारा कॉन्ट्रैक्ट पूरा हो गया तब से दुकान में ताला पड़ा है।
इतना ही नहीं रोहन पचौरी के पते पर भी जब टीम पहुंची तो वह भी गलत निकला। इसी तरह की अन्य फर्मों का पता करने के लिए ड्रग विभाग थाेक फर्मों और गोदामों का सत्यापन करेगा। ड्रग इंस्पेक्टर ओमपाल ने बताया कि सभी थोक फर्मों के सत्यापन के निर्देश मिले हैं। इसमें यह देखा जाएगा कि लाइसेंसी फर्म अपनी स्वीकृत स्थल या भवन पर है या नहीं। वहां पर दवाओं के भंडारण के लिए पर्याप्त व्यवस्था और संबंधित व्यक्ति की उपस्थिति और कौशल-अनुभव की भी जांच होगी। परिसर के अलावा दवा का भंडारण किसी दूसरे गोदाम में हो रहा है तो उस जगह का लाइसेंस लिया है या नहीं, इन सभी बिंदुओं पर जांच की जाएगी। सत्यापन कार्य शुरू होने से पहले अगर कोई थोक दवा विक्रेता अपनी फर्म का लाइसेंस सरेंडर करना चाहता है तो उसके आवेदन को स्वीकार कर लिया जाएगा।
जिस भवन में किरायेदार अपनी फर्म या गोदाम संचालित करना चाह रहे हों तो उसके स्वामी की भी जिम्मेदारी है कि वो उसके बारे में अपने स्तर से भी पुष्टि कर ले कि उनके परिसर में किरायेदार की ओर से वैध लाइसेंस का व्यवसाय किया जा रहा है या नहीं।