कानपुर देहात। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में दलालों और निजी दवा कंपनी के प्रतिनिधि का मकड़जाल कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दिन हो रात वार्डों में घुसकर दलाल मरीज को गुमराह कर निजी अस्पताल ले जाकर लूट घसोट मचाते हैं। गुरुवार रात मरीज को गुमराह कर रहे दलाल को अस्पताल के चौकी प्रभारी ने पकड़ लिया।
जिला अस्पताल में इमरजेंसी से लेकर ओपीडी ब्लॉक में निजी मेडिकल स्टोर, निजी अस्पतालों के दलालों और दवा कंपनी के प्रतिनिधियों का दबदबा रहता है। दलाल दिन रात किसी भी समय अस्पताल पहुंचते और वहां से मरीज के अंदर खौफ पैदा कर उसे निजी वाहन से अस्पताल ले जाते हैं। अस्पताल संचालक मरीज लाने के एवज में दलाल को रुपये देते हैं। लंबे समय से चले आ रहे खेल को रोकने में जिला अस्पताल विफल साबित हो रहा है। इस वजह से गरीब मरीजों के साथ लूट घसोट मची हुई है। गुरुवार को अकबरपुर निवासी दलाल इमरान जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीज को गुमराह कर रहा था। जब मरीजों को शोर मचाया तो अस्पताल परिसर में मौजूद चौकी प्रभारी राकेश कुमार को जानकारी हुई। वह मौके पर पहुंचे और उन्होंने दलाल को पकड़ लिया। इसके बाद उस पर शांति भंग की कार्रवाई की गई। इसी तरह शुक्रवार को ओपीडी के समय निजी दवा कंपनी के प्रतिनिधि सक्रिय दिखे। मानसिक रोग और जनरल फिजिशियन की ओपीडी में वह काफी समय तक बैठकर डॉक्टरों से दवाओं पर चर्चा करते दिखाई दिए। इसी तरह मेडिकल स्टोर के दलाल भी घूमते नजर आए। जिला अस्पताल चौकी प्रभारी राकेश यादव ने बताया कि अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अकबरपुर का इमरान मरीजों को प्राइवेट अस्पताल ले जाने के लिए दबाव बना रहा था। सूचना पर उसे पकड़ लिया गया था। उस पर शांतिभंग की कार्रवाई की गई है। इस संबंध में जब सीएमएस खालिद रिजवान से जानकारी चाही गई तो उनका फोन नहीं उठा।
अस्पताल की सुरक्षा के नहीं हैं खास इंतजाम
जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर कुछ खास इंतजाम नहीं है। इस वजह से दलाल किसी भी समय वार्ड में घुसकर मरीज को गुमराह कर उसे अपने साथ ले जाते हैं। मरीजों अस्पताल ले जाने के लिए कई निजी अस्पतालों की एंबुलेंस व लग्जरी गाड़ियां भी खड़ी रहती है। दलाल उन्हें सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का व्यवहार ठीक न होने, अच्छा इलाज न मिलने की बात कह गुमराह करते है। कई मरीज उनकी बातों में आकर निजी अस्पताल का रुख भी करते हैं। उनके इस काम में अस्पताल के कई कर्मचारी भी संलिप्त रहते हैं।
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ओपीडी के समय सक्रिय रहते दवा कंपनी के प्रतिनिधि
जिला अस्पताल की ओपीडी सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक चलती है। शुक्रवार को ओपीडी के समय निजी दवा कंपनी के प्रतिनिधि सक्रिय दिखाई दिए। मानसिक रोग और जनरल फिजिशियन की ओपीडी में वह काफी समय तक बैठकर डॉक्टरों से दवाओं पर चर्चा करते दिखाई दिए।
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