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‘द्रौपदी’ हर औरत की कहानी

Mon, 25 Jan 2016 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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दि फिल्म्स एंड थियेटर सोसाइटी दिल्ली के चार दिवसीय ‘रंग कानपुर’ नाट्य समारोह के समापन पर रविवार को नाटक ‘द्रौपदी’ का मंचन किया गया। नाटक में जहां द्रौपदी के जीवन को आम महिलाओं से जोड़ा गया, वहीं पुरुषों के हाथों का खिलौना बनी औरत की जिंदगी का चित्रण किया गया।
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नाटक में कलाकारों ने बलात्कार का दंश झेलती औरत, पति या बेटों के सरहद पर शहीद होने के बाद रोती औरत, प्रेम विवाह के कारण ऑनरकिलिंग, गर्भ में मारी जा रही बेटी आदि दृश्यों को दिखाया गया। कलाकारों ने हिंदुस्तान-पाकिस्तान बंटवारे, धर्म और जाति के नाम पर वोट और समाज के बंटवारे संग सोसाइटी में फैली गंदगी पर चोट की।

नाटक के परिदृश्य में स्वांग रचने वाले एक राजस्थानी परिवार की कहानी दिखाई गई। इसमें पुरुष जगह-जगह नाटक करते हैं। नाटक में कानपुर का जिक्र करते हुए कलाकार कप्तान (राकेश बेदी) और उसका भाई खजान (सचिन जोशी) अपने छोटे बेटे की बारात लेकर बाहर गांव जाते हैं।
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रात में हंसी ठिठोली करने बैठी महिलाएं दो दिन पहले ब्याह कर आई बड़े बेटे की बहू के साथ परिवार की परंपराएं निभाती हैं। उधर घर की बेटी पूनम (लतिका जैन) जो किसी से प्यार करती है, उसका विवाह जबरदस्ती किसी और से करा दिया जाता है। वह बताती है कि ससुराल में उसे कैसे प्रताड़ित किया जाता है।

तभी कप्तान की पत्नी राजबाला (हिमानी शिवपुरी) के साथ महिलाएं कप्तान द्वारा लिखा गया स्वांग ‘द्रोपदी’ खेलने को कहती हैं। इसके बाद नाटक का मंचन शुरू होता है। सूत्रधार ‘चाल्यो उस देश जहां संगीत हो, न क्लेश हो न द्वेष हो’ गीत के जरिये नाटक की पटकथा बताता है। नाटक में चौसर और द्रोपदी चीर हरण और युद्ध का मंचन होता है।

इसमें द्रोपदी के दुख, अर्जुन के प्रति उसका प्रेम, अपने पुत्रों की बजाय अभिमन्यु को युद्ध में भेजे जाने की जलन और युद्ध में मारे गए परिजनों के विलाप की कहानी प्रस्तुत की गई। नाटक में कह गए कुछ द्विअर्थी संवाद, खुलेपन, गीत, ठिठोली और प्रस्तुतिकरण पर कई दर्शकों ने आपत्ति जताई। नाटक के बाद कलाकारों को धन्यवाद भी दिया।

पास से थियेटर देखने वाले ज्यादा
कलाकार राकेश बेदी ने कहा कि आज भी ज्यादातर लोग ‘पास’ लेकर थियेटर देखने जाते हैं। कद्रदानों का पता करना हो तो देख लीजिए कि कितने दर्शक टिकट ले कर आए हैं। यह भी बताया कि ‘भाभी जी घर पर हैं’ सीरियल में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि थियेटर में फिल्मों में कहीं ज्यादा मजा आता है।

कानपुर में शुरू होगा राग थियेटर
अलक्क्षेंद्र स्वरूप ने कलाकारों का स्वागत किया और कानपुर में रागेंद्र स्वरूप के नाम से राग थियेटर की शुरुआत करने का आश्वासन दिया। उधर, सोसाइटी ने जून-जुलाई में दोबारा थियेटर करने को कहा।
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